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अलगाववादी नेता नईम खान की याचिका पर 10 फरवरी को सुनवाई: दिल्ली हाई कोर्ट

अलगाववादी नेता नईम खान ने जेल अधिकारियों द्वारा जारी किए गए विभिन्न निर्देशों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

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Edited by Uma Sharma

अलगाववादी नेता नईम खान ने जेल अधिकारियों द्वारा जारी किए गए विभिन्न निर्देशों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. नईम खान ने अपनी याचिका में फोन कॉल और ई-मुलाकात की सुविधा को वापस लेने का जेल अधिकारियों पर आरोप लगाया है. कोर्ट 10 फरवरी को याचिका पर सुनवाई करेगा. जस्टिस सचिन दत्ता याचिका पर सुनवाई करेंगे. खान ने जेल सुपरिटेंडेंट द्वारा 2 सितंबर 2022, 26 दिसंबर 2022, 22 अप्रैल 2024 और 22 मई 2024 को जारी नोटिस को चुनौती दी है.

खान का कहना है कि विवादित नोटिस मनमाने हैं और दिल्ली कारागार अधिनियम, 2000 की धारा 49 और दिल्ली कारगर नियम 2018 के नियम 629 से 633 के विरुद्ध है. नईम गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम मामले में आतंकी फंडिंग के आरोप में 14 अगस्त 2017 से न्यायिक हिरासत में है. उसपर कश्मीर घाटी में अशांति पैदा करने का आरोप है. उन्हें 24 जुलाई 2017 को गिरफ्तार किया गया था. जेल अधिकारियों के मुताबिक नईम पर युएपीए लगा हुआ है.

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इसलिए दिल्ली जेल नियमावली के नियम 631 के तहत कैदियों की विशेष श्रेणी में आता है और उसे फोन कॉल या ई-मुलाकात सुविधाओं का लाभ उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. वही नईम खान का आरोप है कि तिहाड़ जेल सुप्रिटेंडेंट ने एनआईए द्वारा विवादित परिपत्रों के संदर्भ में अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रदान न करने के बहाने मनमाने ढंग से सुविधाएं वापस ले ली है. खान की माने तो कैदियों के एक खास वर्ग से फोन कॉल और ई-मुलाकात सुविधाओं को रोकना सजा के तौर पर है.

याचिका में कहा गया है कि विवादित परिपत्रों के बहाने खान के फोन कॉल और ई-मुलाकात से संबंधित सुविधाओं को. मनमाने ढंग से वापस लेना संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के खिलाफ है. खान के खिलाफ युएपीए मामले में आरोप लगाया गया है कि कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों पर पथराव, स्कूलों को व्यवस्थित रूप से जलाना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुचाना और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के जरिए अशांति पैदा करने की एक बडी आपराधिक साजिश थी. खान के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 121, 121 A और 124 A तथा गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम 1967 की धारा 13, 16, 17, 18, 20, 39 और 40 के तहत दर्ज किया गया है.



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