2013 से देश में राजमार्ग विकास ने भारत की आर्थिक वृद्धि पर कई गुना प्रभाव डाला है. राजमार्ग निर्माण पर किए गए प्रत्येक व्यय के परिणामस्वरूप जीडीपी की वृद्धि में 3.21 इकाई की वृद्धि हुई है, यह जानकारी मीडिया द्वारा प्राप्त भारतीय प्रबंधन संस्थान, बैंगलोर की प्रारंभिक रिपोर्ट से मिली है. इसके अलावा 2013 से 2022 के बीच देश में घरेलू आय में 9% की वृद्धि, घरेलू खर्च में 6% की वृद्धि और कार की बिक्री में 10.4% की वृद्धि हुई है.
इसके अलावा कारखाने और आपूर्तिकर्ता के बीच और कारखाने और ग्राहक के बीच परिवहन की लागत में क्रमशः 2.94% और 1.33% की कमी आई है.
MSME की वृद्धि को बढ़ावा मिला
IIM बैंगलोर के आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन केंद्र (SCMC) द्वारा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के साथ साझेदारी में तैयार की गई इस रिपोर्ट का उद्देश्य इस अवधि के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग विकास के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का आकलन करना था. IIM बैंगलोर में निर्णय विज्ञान (DS) समूह में परिचालन अनुसंधान के प्रोफेसर जीतमित्र देसाई ने मीडिया को बताया, “इस शोध अध्ययन से घरेलू आय में उल्लेखनीय वृद्धि, घरेलू व्यय पर सापेक्ष प्रभाव, कृषि बाजारों तक बेहतर पहुंच, रोजगार की बेहतर पहुंच और नौकरी के अवसरों की उपलब्धता का पता चलता है.”
इसके अलावा उपभोग व्यवहार में उल्लेखनीय परिवर्तन हुए हैं, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की वृद्धि को बढ़ावा मिला है, स्कूलों, उच्च शिक्षा संस्थानों, आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं और सामुदायिक सेवाओं तक पहुंच बढ़ी है और परिवहन पहुंच में एक जिम्मेदार विकास हुआ है.”
राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 1,46,145 किमी पहुंची
प्रोफेसर देसाई के अनुसार, निष्कर्ष उपचार जिलों में अपराध दर, दुर्घटनाओं, प्रदूषण, शोर के स्तर और भीड़भाड़ में कमी का भी संकेत देते हैं. परिणाम सौ से अधिक जिलों में सर्वेक्षण डेटा और पद्धतिगत विश्लेषणों पर आधारित हैं, जिन्हें रोजगार, आर्थिक जीवन शक्ति, पहुंच और जीवन की समग्र गुणवत्ता सहित विविध सामाजिक-आर्थिक संदर्भों को शामिल करने के लिए रणनीतिक रूप से चुना गया है, जो राष्ट्रीय राजमार्गों की उपस्थिति से प्रभावित (या नहीं) हैं.
भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 2013-15 में 91,287 किमी से बढ़कर 2023-24 में 1,46,145 किमी हो गई है, जो 60.1% की वृद्धि है, जबकि सड़क बुनियादी ढांचे के निर्माण पर खर्च 2014-15 में 37,588 करोड़ रुपये की तुलना में पांच गुना से अधिक बढ़कर 2023-24 में 2,40,427 करोड़ रुपये हो गया है.
-भारत एक्सप्रेस
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