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बिहार तो खामखा बदनाम है…! मध्य प्रदेश के अभेद्य किले से क्रेन लेकर बदमाश उड़ा ले गए 500 साल पुरानी तोप

Historical Cannon Stolen: शिवपुरी के ऐतिहासिक नरवर किले से 25-30 हथियारबंद बदमाश क्रेन और ट्रक की मदद से 500 साल पुरानी, 3000 किलो वजनी अष्टधातु की तोप लूट ले गए. बंदूक की नोक पर सुरक्षाकर्मियों को बंधक बनाकर दी गई इस वारदात के बाद पुलिस को अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्करों पर शक है.

Shivpuri Narwar Fort cannon theft

Historical Cannon Stolen: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां हथियारबंद डकैतों ने धावा बोलकर 500 साल पुरानी अष्टधातु की एक बहुमूल्य तोप लूट ली है.

15-16 जुलाई की रात करीब 25 से 30 हथियारबंद बदमाश क्रेन और ट्रक लेकर किले के पिछले रास्ते से अंदर घुसे. उन्होंने वहां तैनात लाठीधारी सुरक्षाकर्मियों को बंदूक की नोक पर धमकाया और ओपन कचहरी परिसर में रखी 14 ऐतिहासिक तोपों में से एक भारी-भरकम तोप उखाड़ ले गए. पुलिस को इस मामले में किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह का हाथ होने का संदेह है.

क्या है मामला?

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से सुरक्षा व्यवस्था और पुरातत्व संरक्षण को तार-तार करने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है. सिंधिया राजवंश के ऐतिहासिक गौरव के प्रतीक नरवर किले पर 15 और 16 जुलाई की दरम्यानी रात करीब 25 से 30 हथियारबंद बदमाशों ने धावा बोल दिया. बदमाश किले के ओपन कचहरी परिसर से लगभग 500 साल पुरानी और करीब 3000 किलोग्राम वजनी अष्टधातु की एक बहुमूल्य तोप को लूटकर आसानी से फरार हो गए. इस दुस्साहसिक डकैती के बाद अब परिसर में 14 की जगह केवल 13 तोपें ही बची हैं.

सोची-समझी प्लानिंग के साथ आए थे चोर (Shivpuri Narwar Fort cannon theft)

जांच में यह बात साफ हुई है कि बदमाश पूरी तैयारी और सोची-समझी प्लानिंग के साथ आए थे. इतनी भारी-भरकम तोप को हाथ से ले जाना मुमकिन नहीं था, इसलिए डकैत अपने साथ एक क्रेन और भारी ट्रक (लोडिंग गाड़ियां) लेकर आए थे. उन्होंने किले के सुनसान पिछले रास्ते का इस्तेमाल कर अंदर प्रवेश किया. घटना के समय ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी बालकिशन ने अपनी बेबसी बयां करते हुए बताया कि आधुनिक हथियारों से लैस बदमाशों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी. किले में पर्याप्त रोशनी और टॉर्च जैसी बुनियादी सुविधाएं न होने और आत्मरक्षा में सिर्फ एक लाठी होने के कारण सुरक्षाकर्मी पीछे हटने को मजबूर हो गए.

12 दिन पहले भी संदिग्ध गतिविधियां देखी गई (Historical cannon stolen MP)

इस वारदात का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि करीब 12 दिन पहले भी किले के आसपास कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखी गई थीं, लेकिन प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. 16वीं शताब्दी की यह दुर्लभ तोप न केवल उन्नत धातुकर्म तकनीक का बेजोड़ नमूना थी, बल्कि इस पर की गई विशेष नक्काशी और ऐतिहासिक चिह्न इसे बेहद कीमती बनाते हैं. अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में इस तरह की एंटीक (प्राचीन) वस्तुओं की कीमत करोड़ों रुपये आंकी जाती है.

पुलिस जांच में जुटी (Karera Police Station)

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ डकैती और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस और साइबर सेल की टीमें आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ-साथ एंटीक तस्करी से जुड़े संदिग्ध नेटवर्कों की जांच कर रही हैं. करैरा के एसडीओपी प्रशांत शर्मा ने बताया कि इस मामले में किसी अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता. वहीं, राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए जल्द ही मौके का निरीक्षण करने और सुरक्षा की समीक्षा करने की बात कही है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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