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इजराइल और फिलिस्तीन एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन, भारत दोनों देशों के साथ कैसे साधता है रिश्ते?

India Israel Palestine diplomacy: भारत ने दशकों से इजराइल और फिलिस्तीन के बीच संतुलन बनाए रखा है. भारत दोनों देशों के साथ कैसे साधता है रिश्ते?

India Israel Palestine diplomacy: इजराइल और फिलिस्तीन दशकों से कट्टर दुश्मन बने हुए हैं. जमीन, सीमाओं और अधिकारों को लेकर दोनों देशों में लगातार संघर्ष चलता रहा है. हजारों लोग इस विवाद में अपनी जान गंवा चुके हैं. इसके बावजूद भारत ने दोनों देशों के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखे हैं. इजराइल भारत से खुश रहता है और फिलिस्तीन भी नाराज नहीं होता.

आजादी के बाद की नीति

1947 में स्वतंत्रता के बाद पंडित नेहरू और महात्मा गांधी ने फिलिस्तीन मुद्दे का समर्थन किया. उन्होंने धर्म के आधार पर दो राष्ट्रों के विचार को खारिज किया. यह फैसला अरब देशों, गुटनिरपेक्ष आंदोलन और संयुक्त राष्ट्र की सहमति से मेल खाता था.

इजराइल को मान्यता और शुरुआती रिश्ते

1950 में भारत ने इजराइल को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी. हालांकि रिश्ते बहुत गर्मजोशी भरे नहीं थे. तेल अवीव को मुंबई में कॉन्सुलेट खोलने की अनुमति मिली, लेकिन नई दिल्ली में दूतावास की इजाजत नहीं दी गई. 1962 में चीन युद्ध के दौरान भारत ने इजराइल से मदद भी मांगी.

फिलिस्तीन को समर्थन

1975 में भारत ने फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) को मान्यता दी और नई दिल्ली में उसका कार्यालय खोला. यासिर अराफात के साथ भारत के रिश्ते बेहद करीबी रहे. 1988 में भारत फिलिस्तीन को मान्यता देने वाला पहला गैर-अरब देश बना.

इजराइल से औपचारिक रिश्ते

1992 में भारत ने इजराइल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए. इसके कुछ ही समय बाद चीन ने भी ऐसा किया.

बीजेपी के दौर में बदलाव

बीजेपी के सत्ता में आने के बाद भारत का इजराइल को देखने का नजरिया बदला. कारगिल युद्ध के दौरान इजराइल ने भारत को हथियारों की मदद दी. 2000 में वाजपेयी सरकार ने आडवाणी और जसवंत सिंह को इजराइल भेजा. 2003 में एरियल शेरोन भारत आने वाले पहले इजराइली प्रधानमंत्री बने.

मोदी सरकार में गहराते रिश्ते

2014 में पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद भारत-इजराइल संबंध और मजबूत हुए. 2016 में सुषमा स्वराज इजराइल गईं और 2017 में मोदी वहां जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने. इसके बाद व्यापार तेजी से बढ़ा. 2000 में 900 मिलियन डॉलर का व्यापार 2024 में 6.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. इजराइल भारत का भरोसेमंद हथियार सप्लायर भी बन गया.

फिलिस्तीन का दौरा

2018 में पीएम मोदी फिलिस्तीन गए. राष्ट्रपति अब्बास ने उनका स्वागत किया और भारत की शांति समर्थक भूमिका की सराहना की. मोदी ने भरोसा दिलाया कि भारत फिलिस्तीनी हितों के लिए प्रतिबद्ध है.

संतुलन की नीति

विशेषज्ञों का कहना है कि मोदी सरकार ने दोनों देशों के साथ रिश्ते साधे. 2021 में भारत ने UNHRC में इजराइल के खिलाफ वोट किया और ICC की जांच में भी उसका समर्थन नहीं किया. भारत हमेशा टू-स्टेट सॉल्यूशन पर जोर देता है.

गाजा संकट पर चिंता

भारत ने गाजा में मानवीय संकट पर चिंता जताई और दवाइयों व मेडिकल सप्लाई भेजी. भारत फिलिस्तीन की UN सदस्यता का समर्थन करता है और बातचीत से समाधान निकालने का पक्षधर है.

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हालिया घटनाक्रम

जनवरी 2026 में फिलिस्तीन की विदेश मंत्री भारत आईं और पीएम मोदी से मुलाकात की. मोदी ने फिलिस्तीन के लिए भारत के समर्थन को दोहराया और गाजा में शांति प्रयासों का स्वागत किया.

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-भारत एक्सप्रेस



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