भारत और नेपाल की सैन्य मित्रता को एक नई ऊँचाई पर पहुंचाते हुए दोनों देशों की एक संयुक्त पर्वतारोहण टीम ने दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी, माउंट कंचनजंघा (8,586 मीटर), पर सफल चढ़ाई की है. यह साहसिक उपलब्धि सोमवार, 19 मई 2025 को हासिल की गई, जब टीम के सभी नौ सदस्य सुबह 7:40 बजे शिखर पर पहुंचे. इस अभियान का नेतृत्व भारतीय सेना के कर्नल सरफराज़ सिंह और नेपाली सेना के कैप्टन प्रशांत खांका ने किया. भारतीय टीम में कुल पांच और नेपाली टीम में चार सदस्य शामिल थे.
शिखर तक पहुंचने के लिए टीम ने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना किया. कैंप IV (लगभग 7,700 मीटर) से अंतिम चढ़ाई के दौरान टीम ने -30 डिग्री सेल्सियस तापमान, ऑक्सीजन की अत्यधिक कमी और तेज बर्फीली हवाओं जैसी गंभीर चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया. इसके बावजूद सभी सदस्य सुरक्षित शिखर तक पहुंचे और वहां भारत और नेपाल के राष्ट्रीय ध्वज को एक साथ फहराकर दोस्ती, विश्वास और साझेदारी का प्रतीकात्मक संदेश दिया. शिखर विजय के बाद टीम अब एक चरणबद्ध वापसी की प्रक्रिया में है और 22 मई तक बेस कैंप में लौटने की उम्मीद है.
गुलमर्ग और सिक्किम में संयुक्त अभ्यास
इस अभियान से पहले दोनों देशों की सेनाओं ने संयुक्त रूप से गुलमर्ग स्थित ‘हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल’ में कठोर प्रशिक्षण लिया और सिक्किम हिमालय में पूर्व-अभ्यास किया. इस अभियान ने दोनों सेनाओं की पेशेवर क्षमता, धैर्य, समन्वय और उच्च स्तरीय अंतर-सेनात्मक सहयोग को उजागर किया है. भारतीय और नेपाली सेना के वरिष्ठ नेतृत्व ने इस ऐतिहासिक विजय पर टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल साहसिक खेलों को बढ़ावा देगी, बल्कि आपदा प्रबंधन अभ्यासों और दोनों देशों की जनता के बीच आपसी संबंधों को भी और मजबूत करेगी.
यह पर्वतारोहण अभियान एक साधारण मिशन नहीं, बल्कि भारत-नेपाल के बीच गहरे सैन्य और कूटनीतिक रिश्तों का प्रतीक है. यह दिखाता है कि जब दो देशों के जांबाज़ सैनिक साथ आते हैं, तो वे न केवल पहाड़ों को फतह कर सकते हैं, बल्कि दिलों को भी जोड़ सकते हैं.
ये भी पढ़ें: हरियाणा में सचिवालय को RDX से उड़ाने की धमकी, मद्रास टाइगर के नाम से DC को भेजी ई-मेल
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

