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CJI बनते ही क्या करेंगे जस्टिस सूर्यकांत? मीडिया को बताई सबसे बड़ी प्राथमिकता

Justice Surya Kant Top Priority: भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश बनने जा रहे जस्टिस सूर्यकांत ने आज मीडिया से बात की है. इस दौरान उन्होंने अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं के बारे में बताया है.

India Next CJI Justice Surya Kant Reveals Top Priority As Leader Of Supreme Court

Justice Surya Kant Top Priority: भारत के नामित CJI सूर्यकांत ने शपथ ग्रहण से पहले मीडिया से मुलाकात की और कहा कि सुप्रीम कोर्ट और पूरे देश में मुकदमों के बढ़ते बोझ को घटाने के लिए समानांतर योजनाएं लागू करेंगे. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमारी प्राथमिकता अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम करने की होगी. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमारी प्राथमिकता अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम करने की होगी. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों और देशभर की अदालतों में लंबित मामलों को कैसे कम करना है, इस पर काम किया जाएगा.

बता दें जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश होंगे. वह 24 नवंबर को शपथ लेंगे और 25 नवंबर से अपना कार्यभार संभालेंगे. जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल करीब 14 महीने का होगा. वे 9 फरवरी 2027 को रिटायर होंगे.

CJI बनकर सबसे पहला कदम

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश की शपथ लेने के तुरंत बाद वे देशभर के सभी हाईकोर्ट से बात कर ऐसे मामलों की पहचान करेंगे और उनका निपटारा करेंगे, जिसकी वजह से निचली अदालतों में मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार सबसे बड़ी पक्षकार (वादी) है. इस मसले पर भी काम किया जाएगा कि इसे कैसे कम किया जाए.

मुकदमेबाजी के बोझ को कम करने पर काम

उन्होंने कहा कि अगले कुछ हफ्तों में पांच, सात और नौ जजों की संविधान पीठ गठित कर लंबे समय से लंबित महत्वपूर्ण मुकदमों की सुनवाई कराने पर कदम उठाए जाएंगे. मध्यस्थता को भी कारगर ढंग से लागू किया जाएगा ताकि लाखों मुकदमों का बोझ घटाया जा सके. राज्य सरकारों, केंद्र और राज्य के बीच मुकदमेबाजी के बोझ को कम करने के लिए मध्यस्थता को बढ़ावा दिया जा सकता है. इसके लिए अनुकूल माहौल तैयार करना होगा.

AI पर क्या बोले जस्टिस सूर्यकांत

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कई मुद्दे और चुनौतियां हैं. इसके फायदे भी हैं, लेकिन लोगों के मन में कुछ डर भी हैं. इसे प्रक्रियात्मक मामलों में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन हर कोई चाहता है कि उसके मुकदमे का फैसला जज के जरिए हो.

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अक्सर फैसलों को लेकर सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग के सवाल पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि समस्या होगी तो इसका समाधान भी होगा. देश के चीफ जस्टिस या किसी भी कोर्ट के जज को किसी भी तरह की आलोचनाओं के दबाव में नहीं आना चाहिए.

क्या खुलेगी इलाहाबाद हाईकोर्ट की नई बेंच

इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक और बेंच खोले जाने के सवाल पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जाहिर तौर पर यह एक मुद्दा है, लेकिन किसी भी हाईकोर्ट की स्थापना को लेकर कुछ भावनाएं जुड़ी होती हैं. लखनऊ बेंच में काफी अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर है, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट में आधुनिक सुविधाओं का अभाव है. जजों की संख्या पूरी नहीं हो पा रही है. पार्किंग की समस्या है. उत्तर प्रदेश बहुत बड़ा राज्य है. जाहिर तौर पर लोगों को त्वरित न्याय मिलना चाहिए. हालांकि किसी भी हाईकोर्ट की नई बेंच के गठन के लिए संसद, पेरेंट हाईकोर्ट सहित सभी को फैसला लेना होता है.



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