Urdu Conclave 2026

भारत 2047 तक ब्रह्मपुत्र बेसिन से 76 GW की हाइड्रोपावर ट्रांसमिशन परियोजना शुरू करने की बना रहा योजना, 77 अरब डॉलर होंगे खर्च

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने सोमवार (13 अक्टूबर) को घोषणा की है कि भारत के इलेक्ट्रिसिटी प्लानिंग ऑथोरिटी 2047 तक ब्रह्मपुत्र बेसिन से 76 गीगावाट (GW) से अधिक हाइड्रोपावर क्षमता का उत्पादन और परिवहन करेगी.

HYDRPOWER PLANT BRAHAMPUTRA

Brahamputra Basin Hydropower Project: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने सोमवार (13 अक्टूबर) को घोषणा की है कि भारत की इलेक्ट्रिसिटी प्लानिंग ऑथोरिटी 2047 तक ब्रह्मपुत्र बेसिन से 76 गीगावाट (GW) से अधिक हाइड्रोपावर क्षमता का उत्पादन और परिवहन करेगी. इसके लिए 6.4 ट्रिलियन रुपये ($77 बिलियन) की एक महत्वाकांक्षी ट्रांसमिशन योजना का अनावरण किया है. इस पहल का उद्देश्य भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को मज़बूत करते हुए बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करना है.

इस योजना में पूर्वोत्तर राज्यों के 12 उप-बेसिनों में 208 बड़ी हाइड्रोपावर परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें पारंपरिक हाइड्रोपावर पावर प्लांट से कुल 64.9 गीगावाट और पंप-भंडारण परियोजनाओं से अतिरिक्त 11.1 गीगावाट की क्षमता है. इसमें चीन सीमा से सटे अरुणाचल प्रदेश में अकेले 52.2 गीगावाट की संभावित क्षमता शामिल है.

तिब्बत से निकलने वाली ब्रह्मपुत्र नदी भारत और बांग्लादेश से होकर बहती है, जिससे इसके भारतीय क्षेत्र में पर्याप्त हाइड्रोपावर क्षमता उपलब्ध होती है. इसकी सीमा ट्रांसनेशनल और चीन से निकटता, जल प्रबंधन और बुनियादी ढांचे के विकास को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है.

चरणबद्ध निवेश योजना

CEA ने दो-चरण में निवेश की रूपरेखा तैयार की है. पहले चरण 2035 तक चलेगा और इसके लिए 1.91 ट्रिलियन रुपये की आवश्यकता होगी, जबकि दूसरे चरण में 4.52 ट्रिलियन रुपये खर्च होने का अनुमान है. इस योजना में NHPC, NEEPCO, और SJVN सहित केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की आवंटित परियोजनाएं भी शामिल हैं, जिनमें से कुछ परियोजनाएं पहले से ही चल रही हैं.

रणनीतिक महत्व और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य

ब्रह्मपुत्र बेसिन अरुणाचल प्रदेश, असम, सिक्किम, मिज़ोरम, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड और पश्चिम बंगाल में फैला हुआ है, जिसमें भारत की 80% से अधिक अप्रयुक्त हाइड्रोपावर क्षमता मौजूद है. इन संसाधनों का विकास भारत के व्यापक ऊर्जा उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसमें 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करना शामिल है.

इस योजना से ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि, क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा और दूरदराज के हाइड्रोपावर परियोजनाओं से पूरे भारत में अधिक मांग वाले केंद्रों तक स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाने के लिए एक मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क प्रदान करने की उम्मीद है.


ये भी पढ़ें: मोदी सरकार ने शुरू किया ‘कर्मचारी नामांकन अभियान’, सामाजिक सुरक्षा कवरेज का होगा विस्तार


-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read