India Water Metro
India Water Metro: भारत में मेट्रो अब सिर्फ पटरियों पर ही नहीं, पानी की लहरों पर भी दौड़ती दिखाई देगी. कोच्चि में शुरू हुई देश की पहली वाटर मेट्रो सेवा के बाद अब केंद्र सरकार इस मॉडल को देश के अन्य शहरों में भी आगे बढ़ाने की तैयारी में है. शुरुआती स्तर पर देश के 18 शहरों को वाटर मेट्रो सेवा के लिए संभावित माना गया है. इनमें पटना, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या और श्रीनगर जैसे शहर शामिल हैं.
यानी आने वाले समय में लोग पटना और वाराणसी में गंगा की लहरों पर मेट्रो जैसी सुविधा का अनुभव कर सकते हैं, तो वहीं श्रीनगर की डल झील में भी आधुनिक वाटर मेट्रो चलती नजर आ सकती है.
भारत में वाटर मेट्रो की इस सोच को मजबूत आधार देने का श्रेय कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक लोकनाथ बेहरा और उनकी टीम को जाता है. अप्रैल 2023 में कोच्चि में देश की पहली वाटर मेट्रो सेवा शुरू हुई थी. यह सिर्फ एक परिवहन सेवा नहीं, बल्कि भारत के शहरी यातायात की सोच में बड़ा बदलाव माना गया. इसी पहल के बाद लोकनाथ बेहरा को ‘एक्वा मैन ऑफ इंडिया’ और ‘वाटर मेट्रो मैन ऑफ इंडिया’ के रूप में पहचान मिलने लगी.

आईपीएस अधिकारी रहे हैं लोकनाथ बेहरा
लोकनाथ बेहरा 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं. वे 2009 में गठित राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल रहे. मुंबई हमले के मास्टरमाइंड डेविड हेडली से जुड़े मामले में अमेरिका गई टीम का भी वे हिस्सा रह चुके हैं. अब कोच्चि मेट्रो के नेतृत्व में उन्होंने जल परिवहन को आधुनिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम के रूप में नई दिशा दी है.
अब इसी मॉडल को देश के अलग-अलग शहरों में लागू करने की तैयारी है. बिहार की राजधानी पटना में वाटर मेट्रो सेवा दीघा घाट से पटना सिटी के कंगन घाट तक चलाई जाने की योजना है. इसके बीच गांधी घाट और गाय घाट जैसे प्रमुख स्टॉपेज होंगे. शुरुआती किराया करीब 20 रुपये रखने की योजना है. दूसरे चरण में इस सेवा का विस्तार दानापुर और सोनपुर के हरिहरनाथ क्षेत्र तक किया जा सकता है.
आधुनिक इलेक्ट्रिक नावें होंगी वातानुकूलित
वाटर मेट्रो में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक इलेक्ट्रिक नावें 42 मीटर लंबी और वातानुकूलित होंगी. एक नाव में कुल 75 यात्री सफर कर सकेंगे. इनमें 50 यात्रियों के बैठने और 25 यात्रियों के खड़े होने की क्षमता होगी. सुरक्षा और सुविधा के लिए इनमें सीसीटीवी कैमरे, एलसीडी स्क्रीन, साउंड सिस्टम और बड़ी कांच की खिड़कियां होंगी, ताकि यात्री सफर के दौरान नदी, घाट और आसपास के नजारों का आनंद भी ले सकें.
कोच्चि वाटर मेट्रो ने यह दिखाया कि पानी पर चलने वाली सेवा केवल पारंपरिक फेरी सिस्टम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. इसे आधुनिक, तकनीक आधारित, पर्यावरण अनुकूल और मेट्रो जैसी भरोसेमंद पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवा में बदला जा सकता है. कोच्चि में इलेक्ट्रिक बोट, आधुनिक टर्मिनल, डिजिटल टिकटिंग, यात्री सुविधाएं और मेट्रो रेल व बस सेवाओं के साथ बेहतर कनेक्टिविटी पर खास ध्यान दिया गया.
लोगों को शहर की मुख्यधारा से जोड़ने में मिली मदद
इस सेवा से कोच्चि के द्वीपों और जल क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों को शहर की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिली. सड़क पर ट्रैफिक का दबाव कम हुआ, यात्रा सस्ती और सुरक्षित हुई, साथ ही ईंधन की बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे पर्यावरणीय लाभ भी सामने आए.

कोच्चि मॉडल की सफलता के बाद अब कई राज्यों में वाटर मेट्रो की संभावनाओं का अध्ययन शुरू हो गया है. महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम के डिब्रूगढ़ व तेजपुर जैसे शहरों में भी इस मॉडल को लेकर चर्चा तेज है. उत्तर प्रदेश में वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज जैसे धार्मिक और पर्यटन महत्व वाले शहरों को वाटर मेट्रो से जोड़ने की योजना पर काम हो रहा है. वाराणसी में घाटों और पर्यटन क्षेत्रों, अयोध्या में मंदिर पर्यटन क्षेत्र और प्रयागराज में संगम क्षेत्र को ध्यान में रखकर संभावनाएं देखी जा रही हैं.
कोच्चि वाटर मेट्रो को राष्ट्र को समर्पित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2023 में कोच्चि वाटर मेट्रो को राष्ट्र को समर्पित करते हुए इसे हरित और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया था. केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी अलग-अलग राज्यों में इस मॉडल को अपनाने की जरूरत पर जोर दे चुके हैं. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने भी गुवाहाटी, डिब्रूगढ़ और तेजपुर जैसे शहरों में वाटर मेट्रो की संभावनाओं की सराहना की है.
लोकनाथ बेहरा का मानना है कि भविष्य का सार्वजनिक परिवहन केवल सड़क, रेल या हवा तक सीमित नहीं रह सकता. मेट्रो रेल, बस सेवा, जलमार्ग, पैदल यात्री सुविधा और साझा टिकटिंग सिस्टम को जोड़कर ही बेहतर, सस्ता और पर्यावरण अनुकूल परिवहन तंत्र तैयार किया जा सकता है. कोच्चि वाटर मेट्रो इसी सोच का सफल उदाहरण बनकर उभरी है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देशभर में वाटर मेट्रो नेटवर्क विकसित होता है, तो इससे इलेक्ट्रिक बोट निर्माण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक टर्मिनल, जलमार्ग इंजीनियरिंग, परियोजना प्रबंधन और शहरी परिवहन जैसे क्षेत्रों में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
जल संपदा के मामले में अमीर है भारत
भारत के पास नदियों, झीलों, बैकवाटर्स और अंतर्देशीय जलमार्गों की बड़ी संपदा है. अब तक इन्हें अधिकतर पर्यटन या प्राकृतिक संसाधन के रूप में देखा जाता था, लेकिन कोच्चि वाटर मेट्रो ने यह साबित किया है कि ये जलमार्ग आधुनिक शहरी परिवहन का मजबूत विकल्प भी बन सकते हैं.
ये भी पढ़ें- सामने से दौड़ी चली आ रही थी ट्रेन, पटरी पर खड़े बच्चे को गाय ने खींचकर बचा लिया? इंटरनेट पर इस VIDEO से मचा तहलका
अगर आने वाले वर्षों में देश के अलग-अलग शहरों में वाटर मेट्रो परियोजनाएं सफल होती हैं, तो यह भारत के परिवहन इतिहास में बड़ा बदलाव साबित होगा. इस बदलाव के केंद्र में लोकनाथ बेहरा की वह सोच है, जिसने पानी को सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य नहीं, बल्कि कनेक्टिविटी, विकास और हरित भविष्य का रास्ता माना.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.





