भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा गया है. खास बात यह है कि ये विमान ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनाए जाएंगे जिसमें 60% तक स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल होगा. फ्रांस की डसॉस्ट एविएशन और भारतीय एयरोस्पेस कंपनियां मिलकर इन विमानों का निर्माण करेंगी. इस डील की कीमत दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है.
वायुसेना के पास कितने स्क्वॉड्रन हैं?
फिलहाल वायुसेना के पास 29 स्क्वॉड्रन हैं, जिनमें से मिग-21 के दो स्क्वॉड्रन इसी महीने रिटायर हो रहे हैं. इससे स्क्वॉड्रन की संख्या घटकर 27 रह जाएगी. तेजस मार्क 1 A की डिलीवरी में देरी और पांचवीं पीढ़ी के एयरक्राफ्ट एमका की अनिश्चितता को देखते हुए राफेल एक व्यवहारिक विकल्प बनकर उभरता है.
क्या अमेरिका से विमान खरीदने की संभावना है?
रूस का SU-57 अभी पूरी तरह तैयार नहीं है और अमेरिका से लड़ाकू विमान खरीदने की संभावना कम है. ऐसे में राफेल ही एकमात्र ऐसा विकल्प है जिसे वायुसेना पहले से इस्तेमाल कर रही है. वायुसेना के पास पहले से ही 36 राफेल हैं जिससे नए विमानों के लिए अलग से इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
कितने राफेल खरीदने की योजना है?
सूत्रों की माने तो वायुसेना 3 से 5 स्क्वॉड्रन यानी लगभग 114 राफेल खरीदने की योजना बना रही है ताकि आने वाली चुनौतियों का सामना किया जा सके. मेक इन इंडिया के तहत निर्माण से लागत भी कम होगी और फ्रांस के साथ रक्षा साझेदारी और मजबूत होगी.
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हालांकि अभी तक रक्षा मंत्रालय या वायुसेना की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन यह प्रस्ताव देश की सुरक्षा और स्वदेशी निर्माण को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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