भारतीय सेना की दक्षिणी कमानंड (Southern Command) इन दिनों एक्शन मोड में है. हाल ही में कमान के मुखिया, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने गुजरात का एक व्यापक दौरा किया, जो न केवल सैन्य रणनीति के लिहाज से अहम था, बल्कि इसमें मानवीय संवेदनाओं की भी एक अनूठी झलक देखने को मिली. इस दौरे का मुख्य केंद्र कच्छ के दुर्गम इलाके और अहमदाबाद का सैन्य सम्मान समारोह रहा.
बॉर्डर पर चौकसी
लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने सबसे पहले कच्छ और क्रीक सेक्टर का रुख किया. यह इलाका अपनी भौगोलिक चुनौतियों के लिए जाना जाता है. यहां उन्होंने ‘गुजरात रक्षा अभ्यास’ का बारीकी से निरीक्षण किया. इस ड्रिल का मकसद सिर्फ ताकत दिखाना नहीं, बल्कि यह परखना था कि मुश्किल से मुश्किल हालात में हमारी सेना कितनी जल्दी रिस्पॉन्स देती है और अलग-अलग एजेंसियां आपस में तालमेल कैसे बिठाती हैं. कमांडर ने साफ कर दिया कि देश की सीमाओं की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा.
200 लोगों की आंखों की लौटाई रोशनी
सेना सिर्फ सरहदों पर तैनात नहीं रहती, बल्कि आम लोगों के सुख-दुख की साथी भी है. भुज मिलिट्री स्टेशन पर इसकी एक भावुक तस्वीर दिखी. यहां सेना ने दिल्ली के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के साथ मिलकर एक विशाल ‘आई कैंप’ लगाया.
इस कैंप की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब 120 गांवों के 2,500 से ज्यादा लोग इलाज के लिए पहुंचे. इनमें से 200 लोग ऐसे थे, जिनकी सर्जरी कर सेना ने उन्हें दुनिया देखने के लिए नई रोशनी दी.
‘वीर नारियों’ का आभार
दौरे का एक महत्वपूर्ण पड़ाव अहमदाबाद था, जहां 6 और 7 फरवरी को ‘इन्वेस्टीचर सेरेमनी’ आयोजित की गई. यहां उन जवानों को सम्मानित किया गया जिन्होंने अपनी ड्यूटी के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया. कुल 34 जवानों को वीरता पुरस्कार मिले और 33 यूनिट्स को उनकी बेहतरीन परफॉरमेंस के लिए प्रशस्ति पत्र दिए गए.
यहीं पर लेफ्टिनेंट जनरल सेठ और उनकी पत्नी कोमल सेठ ने ‘वीर नारियों’ और शहीद जवानों की माताओं से मुलाकात की.
‘शौर्य संध्या’: संस्कृति और वीरता का मिलन
दौरे का समापन एक बेहद भव्य कार्यक्रम ‘शौर्य संध्या’ के साथ हुआ, जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी शामिल हुए. इस शाम ने आधुनिक भारत और परंपरा का एक अनोखा संगम पेश किया. एक तरफ जहां मार्शल आर्ट्स और ‘कलरिपयट्टू’ के जरिए सैनिकों ने अपना दम दिखाया.
वहीं दूसरी ओर खादी के कपड़ों में सजे कलाकारों और भरतनाट्यम की प्रस्तुतियों ने सबका मन मोह लिया. यह कार्यक्रम इस बात का गवाह बना कि भारतीय सेना न केवल रक्षा में अडिग है, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत को भी संजोए हुए है.
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-भारत एक्सप्रेस
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