ब्रह्मोस मिसाइल
भारत ने अपनी समुद्री ताकत को और मजबूती देने के लिए प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए गए नए युद्धपोतों उदयगिरि और हिमगिरि को भारतीय नौसेना में शामिल किया है. ये युद्धपोत ब्रहमोस मिसाइल से लैस हैं, जो अपनी उच्च गति और सटीकता के लिए विश्व में प्रसिद्ध है. हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रहमोस मिसाइल के प्रहार ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा. मिसाइल ने अपने लक्षित क्षेत्र को तहस-नहस कर दिया और भारतीय सेनाओं की क्षमता को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया.
नौसेना में इन नए युद्धपोतों के शामिल होने के बाद, भारतीय नौसेना के पास अब कुल 14 गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट हो गए हैं. प्रत्येक फ्रिगेट में 8 वर्टिकल लॉन्च ब्रहमोस एंटी-शिप मिसाइल लॉन्चर लगाए गए हैं. इससे नौसेना की समुद्री ताकत में बढ़ोतरी हुई है. वहीं, तलवार क्लास के युद्धपोत, जो 2003 से नौसेना में सेवा में हैं, उनमें से चार को ब्रहमोस से लैस किया जा चुका है और शेष दो पर काम चल रहा है.
प्रोजेक्ट 17ए की प्रमुख विशेषताएं
प्रोजेक्ट 17ए के युद्धपोतों की सबसे खासियत यह है कि ये एंटी-सर्फेस और एंटी-शिप वॉरफेयर के लिए तैयार किए गए हैं. इनके पास एयर डिफेंस तोपें और बराक-8 लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम मौजूद हैं, जो एंटी-एयर वॉरफेयर में नौसेना की ताकत को दोगुना करते हैं. इसके अलावा, ये फ्रिगेट पनडुब्बी-रोधी युद्ध के लिए वरुणास्त्र और पनडुब्बी-रोधी रॉकेट लांचरों से लैस हैं. इन युद्धपोतों में दो हेलीकॉप्टर उतर सकते हैं और उनके लिए विशेष हैंगर भी मौजूद है.
स्वदेशी तकनीक और डिजाइन का योगदान
प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए गए सभी सात युद्धपोतों में 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से प्राप्त किए गए हैं. इसका डिजाइन भी पूरी तरह स्वदेशी है और इसमें इस्तेमाल होने वाला स्टील भी भारत में ही निर्मित है. इसे नेवी वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिज़ाइन किया है. 6,700 टन वजन वाले ये फ्रिगेट 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ़्तार से चल सकते हैं.
विशेष रूप से, प्रोजेक्ट 17ए के ये युद्धपोत शिवालिक श्रेणी के युद्धपोतों से 5 प्रतिशत बड़े हैं, जो नौसेना की क्षमता और समुद्री प्रभुत्व को बढ़ाते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रहमोस मिसाइल और इन नए फ्रिगेट्स के आने से भारतीय नौसेना क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा में और मजबूत हो जाएगी.
भारत एक्सप्रेस
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