नई दिल्ली। बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे को लेकर देशभर में बहस तेज़ हो गई है। इस बीच, भारत रक्षा मंच (बीआरएम) ने गृहमंत्री अमित शाह के हालिया बयान का पुरज़ोर स्वागत और समर्थन किया है। मंच का कहना है कि घुसपैठ की समस्या अब राष्ट्रीय संकट का रूप ले चुकी है, जिससे निपटने के लिए ठोस और त्वरित क़दम उठाने की ज़रूरत है।
“परिसीमन और घुसपैठ रोकने के लिए हर राज्य में एनआरसी अनिवार्य रूप से लागू होना चाहिए, ताकि दुबके बैठे घुसपैठियों की पहचान की जा सके।”
– सूर्यकांत केलकर, राष्ट्रीय संयोजक, भारत रक्षा मंच
‘देश के हर कोने में घुसपैठ’
भारत रक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक सूर्यकांत केलकर ने कहा कि मंच पिछले डेढ़ दशक से इस मुद्दे पर लगातार आवाज़ उठा रहा है। उन्होंने बताया कि संगठन की स्थापना 27 जून 2010 को भोपाल में एक अखिल भारतीय सेमिनार के दौरान की गई थी। मंच का उद्देश्य घुसपैठ के ख़िलाफ़ जनजागरण करना और इस राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनाना है।
2010 में भोपाल में हुई थी स्थापना
भारत रक्षा मंच ने पिछले 16 वर्षों में देशभर में घुसपैठ के ख़िलाफ़ जनजागरण के कई कार्यक्रम किए हैं। केलकर ने कहा, “हम चाहते हैं कि हर घुसपैठिए की पहचान की जाए और देश से बाहर निकाला जाए।”
शाह के सख्त़ रुख़ का स्वागत
हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह ने साफ़ किया है कि केंद्र सरकार अब हर घुसपैठिए को चिन्हित कर बाहर निकालेगी। उन्होंने कहा था कि सरकार देश में ‘कृत्रिम जनसांख्यिकीय बदलाव’ की अनुमति नहीं देगी। इस बयान पर केलकर ने कहा, “यह सरकार का साहसिक क़दम है। पिछली सरकारों ने इस मसले को अनदेखा किया, लेकिन मोदी सरकार ने सीमा पर तारबंदी, एनआरसी और नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) जैसे अहम क़दम उठाए हैं।”
बंगाल में बड़ी कार्रवाई
बंगाल में एसआईआर (विशेष गहन संशोधन) के तहत 63 लाख से अधिक घुसपैठियों की पहचान की गई है। केलकर ने बताया कि मंच चाहता है कि ऐसे लोगों को लाइसेंस, आधार और राशन कार्ड देने वालों पर भी सख्त़ कार्रवाई हो।
बंगाल की तस्वीर बदली
राज्य में भाजपा की सरकार आने के बाद स्थितियां तेज़ी से बदली हैं। सूर्यकांत केलकर उन वरिष्ठ नेताओं में से हैं, जिन्हें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को राजनीति में लाने का श्रेय भी दिया जाता है। वे आरएसएस से जुड़े रहे हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है।
तीन सूत्री मांग
मंच ने सरकार से तीन प्रमुख मांगें की हैं- पहली, सभी राज्यों में घुसपैठियों की पहचान हो। दूसरी, घुसपैठियों को दस्तावेज़ बनाने में मदद करने वालों के ख़िलाफ़ दंडात्मक प्रावधान बनाए जाएं। तीसरी, इस मुद्दे पर लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने की रणनीति बनाई जाए।
आगे की राह
गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा के मुख्यमंत्रियों के साथ जल्द ही एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है, जिसमें घुसपैठ रोकने की एक व्यापक रणनीति तैयार की जाएगी। इस बैठक से पहले भारत रक्षा मंच का यह बयान सरकार के रुख़ को सार्वजनिक समर्थन देने वाला माना जा रहा है।
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