अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के 11वें संस्करण पर 21 जून को राजस्थान की रेत पर एक अनोखा योग संगम देखने को मिला. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जैसलमेर के खुड़ी के रेतीले धोरों पर राज्य स्तरीय योग कार्यक्रम में भाग लेते हुए योगाभ्यास किया. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विशाखापत्तनम से दिए गए संबोधन का सीधा प्रसारण भी सुना गया, जिसमें उन्होंने ‘मानवता के लिए योग 2.0’ की शुरुआत का आह्वान किया.
मुख्यमंत्री ने कहा: योग बना जीवनशैली का हिस्सा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि योग अब केवल व्यायाम नहीं बल्कि शरीर, मन, आत्मा और बुद्धि को जोड़ने वाली सम्पूर्ण जीवनशैली बन चुका है. जैसलमेर के खुड़ी में आयोजित इस आयोजन में उन्होंने हजारों नागरिकों, बीएसएफ जवानों, छात्रों और अधिकारियों के साथ योगासन किए और ‘स्वस्थ जीवन शैली’ अपनाने का संकल्प दिलाया.
उन्होंने बताया कि इस वर्ष योग संगम कार्यक्रम में पंजीकरण की संख्या में राजस्थान देशभर में पहले स्थान पर है. लगभग 2.25 लाख लोगों ने इसमें भाग लेने के लिए पंजीकरण कराया, जो प्रदेश के जनमानस में योग के प्रति बढ़ते जुड़ाव का प्रमाण है.
योग: परंपरा, विरासत, विज्ञान और आधुनिकता का मेल
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग भारतीय सभ्यता की वह अनमोल देन है, जिसमें परंपरा और आधुनिकता, विज्ञान और अध्यात्म, सभी एक साथ जुड़ते हैं. योग केवल मेडिटेशन नहीं, बल्कि सभी शारीरिक-मानसिक समस्याओं का मेडिकेशन भी है. उन्होंने योग को तनाव, प्रदूषण और अव्यवस्थित जीवनशैली से छुटकारे का प्रभावी मार्ग बताया.
योग की जड़ें प्राचीन भारत में
सीएम शर्मा ने योग के ऐतिहासिक पक्ष को रेखांकित करते हुए बताया कि प्राचीन भारत में योग मुद्रा में प्राप्त मूर्तियां और अवशेष इसके प्रमाण हैं. भगवान शिव को योग का आदिगुरु माना गया है और महर्षि पतंजलि जैसे ऋषियों ने इसे संरचित ज्ञान परंपरा में परिवर्तित किया.
प्रधानमंत्री के प्रयासों से योग बना वैश्विक पर्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक मंच मिला. वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में जब पीएम मोदी ने योग दिवस का प्रस्ताव रखा तो उसे रिकॉर्ड संख्या में समर्थन मिला. अब यह दिवस केवल भारत का नहीं, संपूर्ण विश्व का पर्व बन गया है.
भारत के साथ योग के मूल्यों का भी वैश्विक विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में योग के साथ-साथ भारतीय संस्कृति के मूल्यों का भी वैश्विक प्रसार हुआ है. राम मंदिर निर्माण से लेकर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और उज्जैन में महाकाल महालोक की स्थापना, सबने भारत की आध्यात्मिक शक्ति को पुनर्स्थापित किया है.
राजस्थान में इसी प्रेरणा से राज्य सरकार रामदेवरा और तनोट माता जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, ताकि आस्था और पर्यटन को एक साथ बढ़ावा दिया जा सके.
सिंधु का पानी अब राजस्थान की ओर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने न केवल आध्यात्मिक बल्कि सामरिक और आर्थिक क्षेत्रों में भी नई ऊंचाइयों को छुआ है. सिंधु जल समझौते को स्थगित कर भारत ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया है. अब सिंधु और चिनाब नदियों का जल राजस्थान तक लाने की योजना पर कार्य हो रहा है.
जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की अपील
मुख्यमंत्री ने जल और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में चलाए गए वंदे गंगा अभियान की जानकारी दी. इस अभियान के अंतर्गत जलस्रोतों की सफाई, कलश यात्रा, जनजागरूकता और पौधारोपण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए. उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत इस वर्ष 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है.
योगासनों से आरंभ हुआ दिन, पौधारोपण के साथ हुआ समापन
मुख्यमंत्री ने ताड़ासन, वृक्षासन, अर्धचक्रासन, भुजंगासन, वज्रासन, कपालभाति और अनुलोम-विलोम जैसे योगासनों का अभ्यास किया और आमजन को भी नियमित रूप से योग अपनाने की प्रेरणा दी. कार्यक्रम के अंत में उन्होंने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया.
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 का यह आयोजन न केवल राजस्थान बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव का क्षण बन गया. योग अब केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बन चुका है — जो हमें ‘मैं’ से ‘हम’ की ओर ले जाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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