US Israel Iran conflict: ईरान और इजराइल के बीच चल रही जंग ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है. इसका असर आम लोगों तक पहुंचने लगा है. भारत में कांग्रेस पार्टी जहां इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, वहीं पार्टी के भीतर ही मतभेद सामने आ गए हैं. कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी और शशि थरूर ने सरकार की विदेश नीति की आलोचना करने के बजाय उसका समर्थन किया है.
दोनों नेताओं का कहना है कि मौजूदा हालात में भारत को बेहद सावधानी से कदम उठाने चाहिए. उनका मानना है कि सरकार इस समय संतुलित रुख अपनाकर सही दिशा में काम कर रही है, जिससे देश और जनता दोनों के हित सुरक्षित रहेंगे.
मनीष तिवारी का क्या कहना है?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि ईरान-इजराइल-अमेरिका का युद्ध भारत का नहीं है. भारत को अपने हितों को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेना चाहिए. उन्होंने तेल, गैस, खाद और विदेशों में रह रहे भारतीयों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन्हें सुरक्षित रखना ही असली रणनीतिक स्वायत्तता है. तिवारी ने कहा कि विरोधाभासी परिस्थितियों में रास्ता निकालना ही समझदारी है और सरकार इस समय वही कर रही है.
शशि थरूर ने क्या कहा?
केरल से सांसद शशि थरूर ने कहा कि भारत की चुप्पी कमजोरी नहीं बल्कि समझदारी है. हर मुद्दे पर जोर से बोलना जरूरी नहीं होता. उन्होंने कहा कि संयम ही असली शक्ति है. अपने हितों की रक्षा करते हुए मूल्यों का सम्मान करना और व्यावहारिकता के साथ आगे बढ़ना ही सही नीति है. थरूर ने साफ कहा कि अगर वे किसी भी सरकार को सलाह देते तो यही कहते कि संयम बरतें.
कांग्रेस में मतभेद
कांग्रेस जहां सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठा रही थी, वहीं उसके ही दो बड़े नेता सरकार के पक्ष में बोल रहे हैं. इससे पार्टी के भीतर असहमति साफ दिखाई दे रही है. यह पहली बार नहीं है जब तिवारी और थरूर ने पार्टी लाइन से हटकर बयान दिया हो. पहले भी कई मौकों पर दोनों नेता अपनी अलग राय रखते आए हैं.
ईरान-इजराइल युद्ध पर कांग्रेस की रणनीति कमजोर पड़ती दिख रही है क्योंकि उसके ही नेता सरकार की नीति को सही ठहरा रहे हैं. इससे साफ है कि पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर एकजुटता नहीं है और मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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