Holi 2026 In Jaipur: जयपुर/नतांश पटेल: गुलाबी नगरी जयपुर की पहचान केवल इसके ऐतिहासिक किलों से नहीं, बल्कि इसकी रगों में बसने वाली कृष्ण भक्ति से भी है. और जब बात फाल्गुन के महीने की हो, तो शहर के आराध्य देव श्री गोविंददेवजी का दरबार साक्षात ‘नंदगांव’ और ‘बरसाना’ में तब्दील हो जाता है. इस बार भी होली के मौके पर मंदिर में कुछ ऐसा ही अद्भुत और अलौकिक नजारा देखने को मिला, जहां चंग की थाप और उड़ते गुलाल ने देसी-विदेशी सभी भक्तों को कृष्ण के रंग में रंग दिया.
पुष्प फागोत्सव के 25 साल
गोविंददेवजी मंदिर में श्रीकृष्ण के शैशव काल की स्मृतियों को जीवंत करते हुए पिछले 25 वर्षों से पुष्प फाग महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. सोमवार को राजभोग झांकी के दौरान मंदिर का नजारा देखने लायक था. उत्सव की शुरुआत तीन प्रकार के सुगंधित फूलों से ठाकुरजी को होली अर्पित करने के साथ हुई.
कलाकारों ने गायन और वादन के जरिए ‘महारास’ और कृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर मंचन किया. मंदिर में राधारानी को सोने की और सखियों को चांदी की पिचकारी थमाई गई. इसके बाद केसर, गुलाब और इत्र मिश्रित जल की बौछारों से भक्तों को सराबोर किया गया.
चंग की थाप और गुलाल की बरसात
जैसे-जैसे उत्सव आगे बढ़ा, पारंपरिक वाद्य यंत्र ‘चंग’ की थाप पर भक्त थिरकने लगे. मंदिर के महंत अंजन गोस्वामी ने ठाकुरजी को गुलाल अर्पित कर विशेष आरती की. इसके बाद पूरे परिसर में लाल, हरा, गुलाबी और पीला गुलाल उड़ाया गया. भक्तों ने हाथ ऊपर कर अपने आराध्य को होली की बधाई दी, जिससे पूरा परिसर ‘जय गोविंद’ के उद्घोष से गूंज उठा.
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ऐतिहासिक होलिका दहन
सोमवार मध्यरात्रि को शहर के विभिन्न चौराहों पर विधि-विधान के साथ होलिका दहन किया गया. सिटी पैलेस में राजपरिवार की प्राचीन परंपरा के अनुसार होलिका दहन संपन्न हुआ. अब आज (मंगलवार) समूचा जयपुर धुलंडी के रंगोत्सव में डूबा हुआ है, जहाँ हर गली और मोहल्ला रंगों से सराबोर है. मंदिर प्रशासन ने भारी भीड़ को देखते हुए हृदय रोग, डायबिटीज और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने और अपने साथ पानी की बोतल रखने की सलाह दी है.
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