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‘मैया सम्मान योजना’ ने बिगाड़ा बजट? पेट्रोल संकट में हेमंत सोरेन सरकार; व्यवस्था हो रही है फेल

Jharkhand Police Fuel Crisis: इन दिनों हेमंत सोरेन सरकार आर्थिक संकट में है. पुलिस गाड़ियों के लिए पेट्रोल के पैसे नहीं है. बीजेपी ने मैया सम्मान योजना को वजह बताया है. पढ़िए पूरी रिपोर्ट

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Jharkhand Police Fuel Crisis: मधुकर आनंद/रांची: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार (Hemant Soren Sarkar) भारी आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है. आलम यह है कि कानून-व्यवस्था संभालने वाली पुलिस के पास अपनी गाड़ियां चलाने के लिए डीजल-पेट्रोल तक के पैसे नहीं बचे हैं. थानों में पुलिस की जिप्सियां और वैन खड़ी हैं, जिससे पेट्रोलिंग प्रभावित हो रही है और अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं. यह स्थिति वोट की खातिर बांटी गई ‘मुफ्त रेवड़ियों’ का नतीजा है.

‘मैया सम्मान योजना’ का साइड इफेक्ट?

नई परिपाटी में देखा जा रहा है कि सत्ता हासिल करने के लिए पार्टियां सरकारी खजाने की परवाह किए बिना मुफ्त योजनाओं का ऐलान कर देती हैं. झारखंड में ‘मैया सम्मान योजना’ (Maiya Samman Yojana) जैसी लुभावनी योजनाओं का भार अब सरकारी खजाने पर दिखने लगा है. थानों में फंड की कमी के कारण गाड़ियां नहीं चल पा रही हैं. पेट्रोलिंग न होने से पुलिस सुस्त हो गई है और इसका सीधा असर अपराध के बढ़ते आंकड़ों पर दिख रहा है.

‘जैसा बोया, वैसा काटोगे’

इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं. झारखंड बीजेपी (Jharkhand BJP) के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा (Pradeep Sinha) ने सरकार पर चुटकी लेते हुए कहा, “सरकार ने बिना सोचे-समझे रेवड़ियां बांटी हैं. अब खजाना खाली है, तो जैसा बोया है, वैसा काटना तो पड़ेगा ही.

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झारखंड कांग्रेस (Jharkhand Congress) के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा (Rakesh Sinha) ने इन सवालों पर नाराजगी जताई. उनका कहना है कि सबके पीछे केंद्र सरकार है. केंद्र राज्य का बकाया पैसा नहीं दे रहा है, जिससे दिक्कतें आ रही हैं. फिर भी हम चीजों को दुरुस्त कर रहे हैं.

ठेकेदार भी हो रहे हैं परेशान

आर्थिक तंगी का असर सिर्फ पुलिस तक सीमित नहीं है. राज्य में ठेकेदारों का भुगतान वर्षों से लंबित है और कई विकास योजनाओं का पैसा रिलीज नहीं हो पा रहा है. हेमंत सोरेन सरकार भले ही केंद्र पर दोषारोपण करे, लेकिन सच्चाई यह है कि राज्य की वित्तीय सेहत बिगड़ चुकी है. अब वक्त एक-दूसरे पर उंगली उठाने का नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था को संभालने का है, वरना चुनाव तो फिर आएंगे, लेकिन जनता का भरोसा उठ जाएगा.



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