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छात्रों ने मांगी CBI, मिली ED… क्या अब बेनकाब होगा JPSC परीक्षा धांधली का मास्टरमाइंड?

JPSC ED Case: झारखंड JPSC भर्ती धांधली मामले में ED ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. 17 दिनों से जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय एजेंसी की एंट्री से जांच का दायरा बढ़ सकता है.

Ranchi student protest update: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है. पिछले 17 दिनों से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़ी कथित गड़बड़ियों के मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की एंट्री हो गई है. केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में PMLA के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. इसके बाद मामले की जांच का दायरा केवल परीक्षा में हुई कथित धांधली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पैसे के लेन-देन और संभावित भ्रष्टाचार के पहलू भी जांच के घेरे में आ गए हैं.

जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय एजेंसी ने करीब एक सप्ताह पहले ही इस मामले में केस दर्ज किया था. अब एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया के दौरान कहीं अवैध तरीके से पैसों का लेन-देन तो नहीं हुआ. इसके साथ ही उन अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका भी जांची जा सकती है, जिन पर इस पूरे मामले से जुड़े होने का आरोप है.

मांगा CBI मिला ED

इस मामले को लेकर 9 अगस्त को छात्र प्रतिनिधियों और राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत हुई थी. बैठक में सरकार की ओर से वित्तीय अनियमितताओं की जांच ED से कराने का प्रस्ताव रखा गया था. हालांकि, छात्रों की मुख्य मांग JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने और पूरे मामले की CBI से जांच कराने की है.

छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं और ऐसे में उन्हें स्वतंत्र एजेंसी से पूरी जांच चाहिए. वहीं, सरकार का तर्क है कि JSSC-CGL परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई है. इसलिए राज्य सरकार अपने स्तर पर परीक्षा रद्द करने या सीधे CBI जांच का आदेश देने की स्थिति में नहीं है.

सरकार के प्रस्ताव से छात्र असहमत

CBI जांच की मांग के बीच सरकार ने वित्तीय लेन-देन की जांच ED से कराने का विकल्प छात्रों के सामने रखा. इसके अलावा रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बनाने और 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट तैयार कराने का प्रस्ताव भी दिया गया. सरकार ने मामले की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की बात भी कही.


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हालांकि, छात्र प्रतिनिधियों ने सरकार के इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया. उनका कहना है कि उनकी मांग सिर्फ आर्थिक गड़बड़ी की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि वे पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच चाहते हैं. ऐसे में ED की जांच शुरू होने के बाद अब इस विवाद में आगे क्या सामने आता है, इस पर छात्रों के साथ-साथ पूरे राज्य की नजर बनी हुई है.

-भारत एक्सप्रेस



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