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झीरम घाटी कांड में 13 साल बाद आया बड़ा फैसला: NIA कोर्ट ने 10 नक्सलियों को सुनाई फांसी की सजा!

Jhiram Valley Case Verdict: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में NIA कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने इस मामले में 10 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई है. 25 मई 2013 को हुए इस माओवादी हमले में कांग्रेस के 27 नेताओं और सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई थी.

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NIA कोर्ट ने 10 नक्सलियों को सुनाई फांसी की सजा!

Jhiram Valley Case Verdict: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में NIA कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने इस मामले में 10 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई है. 25 मई 2013 को हुए इस माओवादी हमले में कांग्रेस के 27 नेताओं और सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई थी, जिसमें कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भी शामिल थे.

NIA के विशेष न्यायाधीष अजय सिंह राजपूत ने इस 13 साल पुराने मामले में सजा सुनाई है. इस केस में 5 सितंबर 2026 को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था.

साल 2013 में छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी में हुए इस नक्सली हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा सहित कुल 27 लोग मारे गए थे.

अदालत ने इन दोषियों को मौत की सजा सुनाई है.

  • प्रमिला मोडियम
  • चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना
  • सुमिता उर्फ पुनेम मोडियम
  • मुक्का मंडवी
  • कोसा कवासी उर्फ कोसाराम
  • आयता मरकाम
  • मड़कामी देवा
  • जोगा मड़कामी
  • बंजामी सन्ना उर्फ चमरू
  • महादेव नाग

गौरतलब है कि इस मामले में कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. इनमें से एक आरोपी की ट्रॉयल के दौरान ही मौत हो गई थी. इस मामले में अन्य 28 आरोपी फरार हैं, जिसमें से माओवादी नेता थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवूजी, बार्से देवा और गणेश उइके शामिल हैं. इसमें से देवूजी ने फरवरी में तेलंगाना में सरेंडर किया था. जबकि बार्से देवा ने जनवरी में सरेंडर कर दिया था और गणेश उइके सुरक्षा बलों के साथ हुए मुठभेड़ में साल 2025 में मारा गया था.

क्या है मामला?

25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर और सुकमा जिलों की सीमा के पास झीरम घाटी में माओवादियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर बड़ा हमला किया था. यह हमला दरभा थाना क्षेत्र में NH-221 पर दोपहर करीब 4:15 बजे हुआ. जांच के मुताबिक, हमले का मुख्य निशाना कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा थे, जिन्हें माओवादियों के खिलाफ आदिवासी अभियान सालवा जुडूम के प्रमुख चेहरों में माना जाता था.

जांच के अनुसार, माओवादियों ने काफिले का रास्ता रोकने के लिए एक लाल बोलेरो के नीचे लैंडमाइन विस्फोट किया. इसके बाद आसपास की पहाड़ियों से करीब दो घंटे तक गोलीबारी और ग्रेनेड हमले किए गए. हमले के दौरान काफिले के करीब 20 वाहन फंस गए. हमलावरों ने सुरक्षा बलों और काफिले में मौजूद लोगों से हथियार और दूसरे उपकरण भी लूटे. इनमें 9 एमएम पिस्तौल, एके-47 राइफलें, मैगजीन, गोलियां, हैंड ग्रेनेड और संचार उपकरण शामिल थे.

NIA की जांच के मुताबिक, यह हमला CPI (माओवादी) की टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन (TCOC) का हिस्सा था. जांच में सामने आया कि 2013 की शुरुआत में हुई बैठकों के दौरान कथित तौर पर ‘क्लास एनिमी’ को निशाना बनाने की योजना बनाई गई थी.

10 साल से ज्यादा चला ट्रायल

हमले के दो दिन बाद NIA ने जांच अपने हाथ में ले ली थी. एजेंसी ने 25 सितंबर 2014 को नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. इसके बाद 28 सितंबर 2015 को 30 अन्य आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंटरी चार्जशीट दाखिल की गई.

मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के अलावा आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और UAPA की धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया. इनमें हत्या, हत्या की कोशिश, आपराधिक साजिश, गैरकानूनी गतिविधियों और आतंकी गतिविधियों से जुड़ी धाराएं शामिल थीं.

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मामले की सुनवाई 10 साल से ज्यादा समय तक चली. इस दौरान अदालत में कुल 294 सुनवाइयां हुईं और अभियोजन पक्ष ने 101 गवाह पेश किए. अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद 5 सितंबर को दोषसिद्धि और 16 सितंबर को सजा का फैसला सुनाया गया. अदालत ने दोषियों को 30 दिन के भीतर हाईकोर्ट में अपील करने का अधिकार भी दिया है. बचाव पक्ष ने अपील करने की बात कही है.

-भारत एक्सप्रेस



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