Justice Yashwant Varma cash scandal: भारत के न्यायिक और संसदीय इतिहास में एक ऐसा भूचाल आया है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से 500-500 रुपये की नोटों की गड्डियां बरामद होने के मामले में उन्हें बुरी तरह दोषी पाया गया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित तीन सदस्यीय संसदीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश कर दी है, जिसमें कहा गया है कि जस्टिस वर्मा न तो इन पैसों का सोर्स बता पाए और न ही कोई संतोषजनक जवाब दे सके.
आग लगी तो खुला ‘कैश’ का राज (Parliamentary Inquiry Committee On Justice Yashwant Varma)
यह पूरा ड्रामा 14 मार्च 2025 की रात शुरू हुआ था, जब दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लग गई थी. आग बुझाने पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम को एक स्टोर रूम में 500-500 रुपये के अधजले नोटों की गड्डियां मिली थीं. इस सनसनीखेज खुलासे के बाद उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया गया. तत्कालीन CJI संजीव खन्ना द्वारा गठित आंतरिक समिति ने पाया कि उस स्टोर रूम पर जस्टिस वर्मा का पूरा नियंत्रण था. इसके बाद जुलाई 2025 में 200 से ज्यादा सांसदों ने उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग (Impeachment) प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे.
सबूतों से छेड़छाड़, पुलिस की गंभीर चूक (Justice Yashwant Varma Case Latest News)
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस और फायर अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि घटनास्थल से कैश को ठीक से जब्त या सुरक्षित नहीं किया गया. स्टोर रूम को सील करने से पहले ही वहां मौजूद सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई और नकदी (करेंसी नोटों) को गायब कर दिया गया. समिति ने जस्टिस वर्मा के रवैये को ‘टालमटोल वाला’ और ‘असंतोषजनक’ करार दिया है.
होगा ऐतिहासिक महाभियोग? (Justice Yashwant Varma impeachment)
इस भारी फजीहत के बाद जस्टिस वर्मा ने अप्रैल 2025 में ही राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेज दिया था. लेकिन पेंच यह है कि उनका नाम अभी भी इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजों की सूची में है. यह अपने आप में देश का पहला ऐतिहासिक मामला होगा, जब किसी जज के इस्तीफे के बावजूद जांच समिति ने उन्हें दोषी पाया है और अब शीतकालीन सत्र में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी है.
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हालांकि, इस पूरे कांड में 2 सवाल आज भी अनसुलझे हैं. पहला- आखिर उस रात स्टोर रूम में असल में कितना कैश था? और दूसरा- घटना वाली रात 2 बजे स्टाफ से क्या बात हुई थी? इसका जवाब शायद महाभियोग की कार्यवाही के दौरान ही मिल सकेगा.
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