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कैलाश विजयवर्गीय क्यों चाहते हैं और महंगी हो जाए चीनी?

Kailash Vijayvargiya On Sugar Prices: मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने चीनी की बढ़ती कीमतों पर बेतुका बयान दिया है. उन्होंने कहा कि चीनी और महंगी होनी चाहिए ताकि बड़े लोग इसे न खाएं. इस बयान पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जोरदार पलटवार किया है.

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कैलाश विजयवर्गीय के अजीबोगरीब बोल

Kailash Vijayvargiya On Sugar Prices: त्योहारी सीजन सिर पर है और आम आदमी बाजार में लगातार बढ़ रही महंगाई से त्रस्त है. इसी बीच मध्य प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री और दिग्गज बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर एक ऐसा अजीबोगरीब बयान दे दिया है, जिसने प्रदेश की सियासत में नया भूचाल ला दिया है. महंगाई पर जनता को राहत देने की बात करने के बजाय विजयवर्गीय ने इसे स्वास्थ्य से जोड़ते हुए कहा कि चीनी और महंगी हो जानी चाहिए.

अजीबोगरीब ‘हेल्थ एडवाइजरी’

मीडिया से बातचीत के दौरान जब चीनी के बढ़ते दामों पर सवाल हुआ, तो विजयवर्गीय ने बेहद अनोखा तर्क दिया. उन्होंने कहा कि आजकल 90 फीसदी लोगों ने मीठा खाना छोड़ दिया है. मैं तो कहता हूं कि चीनी और भी महंगी हो जानी चाहिए. बुजुर्गों को तो चीनी देनी ही नहीं चाहिए, क्योंकि 40 साल से ऊपर के लोगों का चीनी खाना डॉक्टर भी अच्छा नहीं मानता.

विजयवर्गीय यहीं नहीं रुके, उन्होंने एक नया ‘फॉर्मूला’ सुझाते हुए कहा कि सरकारी राशन की दुकानों पर चीनी सिर्फ बच्चों के लिए सस्ती रखी जाए. बड़े लोगों के लिए खुले बाजार में इसकी कीमतें इतनी ज्यादा बढ़ा देनी चाहिए कि वे इसे खरीदने से ही तौबा कर लें.

जीतू पटवारी का पलटवार (Jitu Patwari Target Kailash Vijayvargiya)

कैलाश विजयवर्गीय के इस बयान पर कांग्रेस ने तुरंत मोर्चा खोल दिया. मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jitu Patwari) ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे मिडिल क्लास और गरीब परिवारों का ‘भद्दा मजाक’ करार दिया है. पटवारी ने कहा कि जब रसोई का खर्च लगातार बढ़ रहा है और त्योहारों पर जनता को सस्ती चीजों की जरूरत है, तब बीजेपी के मंत्री अपनी जिम्मेदारियों से भागते हुए महंगाई को बेहद हल्के में ले रहे हैं.

त्योहारों से पहले आसमान पर दाम (Kailash Vijayvargiya Statement On Sugar)

बता दें कि त्योहारी मांग और इथेनॉल मिश्रण जैसी नीतियों के चलते देश भर के खुदरा बाजारों में चीनी के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. सरकार ने कच्चे आयात में बदलाव कर मिलों की दरें स्थिर रखने की कोशिश जरूर की है, लेकिन खुदरा कीमतें अब भी आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं. ऐसे में विजयवर्गीय के इस ‘महंगी चीनी’ वाले बयान ने विपक्ष को बैठे-बिठाए सरकार को घेरने का एक बड़ा राजनीतिक हथियार थमा दिया है.



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