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गुमशुदगी या सियासी स्टंट? कल्याण में पार्षद मधुर म्हात्रे के पिता के बयान ने पलटी पूरी बाजी

कल्याण-डोंबिवली में ठाकरे गुट के पार्षदों के ‘लापता’ होने के ड्रामे ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब पार्षद मधुर म्हात्रे के पिता ने खुद थाने पहुंचकर अपनी ही पार्टी के पदाधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी. पिता का दावा है कि उनका बेटा सुरक्षित है और गुमशुदगी के पोस्टर सिर्फ राजनीति चमकाने के लिए लगाए जा रहे हैं.

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Kalyan Dombivli Politics: अभिषेक/ कल्याण: कल्याण-डोंबिवली की राजनीति में इन दिनों गजब का सस्पेंस और ड्रामा देखने को मिल रहा है. जिस मामले को लेकर ठाकरे गुट सड़क से लेकर पुलिस थाने तक ‘हल्ला बोल’ कर रहा था, अब उसी मामले में घर के ही एक सदस्य ने पूरी कहानी पलट दी है. बात हो रही है ठाकरे गुट के उन पार्षदों की, जिनके “लापता” होने के पोस्टर पूरे शहर में चिपकाए गए थे. अब इस मामले में एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ आ गया है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, कुछ दिनों पहले संजय राउत के निर्देश के बाद ठाकरे गुट के कार्यकर्ता अचानक एक्टिव हो गए. दावा किया गया कि कल्याण-डोंबिवली के चार पार्षद और उनके परिवार रहस्यमयी तरीके से गायब हैं. देखते ही देखते कल्याण पूर्व के इलाकों में “बेपत्ता” होने के पोस्टर लग गए. इनमें पार्षद मधुर म्हात्रे का नाम प्रमुखता से था. युवा सेना के पदाधिकारी नीरज कुमार और उनकी टीम ने इसे लेकर पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई कि उनके साथी मिल नहीं रहे हैं.

पिता ने ही खोल दी पोल

लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब खुद मधुर म्हात्रे के पिता कोळसेवाड़ी पुलिस थाने पहुंच गए. उन्होंने पुलिस से जो कहा, उसने ठाकरे गुट की मुश्किल बढ़ा दी है. मधुर के पिता ने साफ शब्दों में कहा, “मेरा बेटा कहीं गायब नहीं हुआ है. वह पूरी तरह सुरक्षित है और लगातार मेरे संपर्क में है.”

उन्होंने आरोप लगाया कि बिना परिवार की जानकारी के मधुर को “लापता” बताकर पोस्टर लगाए जा रहे हैं, जिससे उनके परिवार की समाज में बदनामी हो रही है. पिता की इस शिकायत के बाद पुलिस ने युवा सेना के पदाधिकारी नीरज कुमार और 2-3 अन्य लोगों के खिलाफ ‘अ-दखलपात्र’ (NC) अपराध दर्ज कर लिया है.

राजनीति की बिसात या सचमुच का डर?

इस पूरे मामले ने अब सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. एक तरफ ठाकरे गुट का दावा है कि उनके पार्षदों पर दबाव बनाया जा रहा है या उन्हें कहीं छिपा कर रखा गया है. वहीं, जब मीडिया की टीम मधुर म्हात्रे और नगरसेविका स्वप्नाली केणे के घर पहुंची, तो वहां ताले लटके मिले थे.

पार्षद के पिता की शिकायत के बाद अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या वाकई ये ‘गुमशुदगी’ का मामला है या फिर आगामी चुनावों और सत्ता की खींचतान के बीच बुना गया कोई सियासी जाल?

पुलिस की जांच

फिलहाल, कल्याण की कोळसेवाड़ी पुलिस दोनों पक्षों की बात सुन रही है. एक तरफ कार्यकर्ताओं की वो शिकायत है जिसमें उन्होंने अपने नेताओं के गायब होने का डर जताया था, और दूसरी तरफ पिता का वो बयान जिसने इस पूरे ‘लापता कांड’ को एक राजनीतिक स्टंट करार दे दिया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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