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शावक की मौत से बौखलाई मादा भालू का खूनी तांडव, एक-एक कर तीन भाई-बहनों को नोचा; दो की दर्दनाक मौत

Chhattisgarh Case: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के मरकाटोला गांव में एक सिरफिरी मादा भालू ने खेत में काम कर रहे एक ही परिवार के तीन भाई-बहनों पर जानलेवा हमला कर दिया. इस दर्दनाक हादसे में भाई और एक बहन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरी बहन अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है.

Chhattisgarh Wild Animal Attack

Chhattisgarh Case: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां अपने शावक की मौत से बौखलाई एक मादा भालू ने एक ही परिवार के तीन सगे भाई-बहनों को अपना शिकार बना लिया. इस भयानक हमले में दो लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि एक महिला गंभीर रूप से घायल है.

छत्तीसगढ़ के कांकेर में अपने शावक की मौत से आक्रामक हुई मादा भालू ने खेत में बैठे हलाल खोर जुर्री पर हमला कर दिया. उन्हें बचाने पहुंचीं उनकी दो बहनों, चमारोन बाई और खोरीनबाई को भी भालू ने बुरी तरह नोच डाला. इस दर्दनाक हादसे में हलाल खोर और चमारोन बाई की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल खोरीनबाई का इलाज जारी है. करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद रायपुर से आई विशेषज्ञ टीम ने भालू को ट्रेंकुलाइजर गन से बेहोश कर काबू में किया.

क्या है मामला?

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित मरकाटोला गांव में बुधवार को वन्यजीव के हमले की एक अत्यंत दुखद घटना घटी. गांव के रहने वाले हलाल खोर जुर्री जब अपने खेत के पास बैठे थे, तभी अचानक एक मादा भालू ने उन पर हमला कर दिया. हलाल खोर की चीख-पुकार सुनकर पास के स्कूल से रसोइया का काम निपटाकर लौट रही उनकी सगी बहन चमारोन बाई उन्हें बचाने दौड़ीं, लेकिन आक्रामक भालू ने उन पर भी हमला कर दिया.

तीसरी बहन की हालत नाजुक, दो की मौत (Kanker Bear Attack)

दोनों को मुसीबत में देख खेत में काम कर रही उनकी तीसरी बहन खोरीनबाई भी भाई-बहन की जान बचाने पहुंचीं. बदकिस्मती से भालू ने खोरीनबाई को भी बुरी तरह नोच डाला. ग्रामीणों के जुटने पर किसी तरह घायल खोरीनबाई को भालू की गिरफ्त से छुड़ाकर कांकेर मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है. हालांकि, हलाल खोर और चमारोन बाई को बचाया नहीं जा सका.

भालू दोनों शवों के पास ही डटी रही (Chhattisgarh Wild Animal Attack)

घटना के बाद आक्रामक मादा भालू दोनों शवों के पास ही डटी रही, जिससे पुलिस और वन विभाग को शव उठाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. लगभग चार घंटे बाद रायपुर से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने ट्रैंक्विलाइजर गन की मदद से भालू को बेहोश किया, तब जाकर शवों को कब्जे में लिया जा सका. ग्रामीणों के अनुसार, एक दिन पहले भालू के शावक की मौत हो गई थी, जिसके कारण वह अपना आपा खो चुकी थी. इस घटना से पूरे गांव में मातम का माहौल है और स्थानीय लोगों में वन विभाग के प्रति गहरा असंतोष है.

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-भारत एक्सप्रेस



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