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आ गई फैसले की घड़ी? कर्नाटक में एक और ब्रेकफास्ट मीटिंग, शिवकुमार ने सिद्दारमैया को बुलाया

Karnataka political Crisis: कर्नाटक के सियासी संकट में एक बार फिर से नई चर्चा शुरी हो गई है. क्योंकि, अब डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री एस सिद्दारमैया को ब्रेकफास्ट के लिए बुलाया है.

Karnataka political Crisis DK Shivakumar invites Siddaramaiah for breakfast meeting

कर्नाटक सियासी संकट

Karnataka political Crisis: कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर आज कोई बड़ा ऐलान हो सकता है. सीएम सिद्दारमैया आज सुबह अपने डिप्टी डीके शिवकुमार के आवास पर ब्रेकफास्ट मीटिंग करने वाले हैं. दोनों नेताओं के बीच तीन दिन बाद नाश्ते पर यह तीसरी मुलाकात होगी. पिछली बार शिवकुमार मुख्यमंत्री आवास गए थे, वहीं आज सिद्दारमैया अपने डिप्टी के घर पर मिलने वाले हैं.

ब्रेकफास्ट मीटिंग को लेकर कैसी चर्चा?

इस दूसरी ब्रेकफास्ट मीटिंग को लेकर सिद्दारमैया ने कहा कि उन्हें औपचारिक आमंत्रण मिलते ही वे पहुंच जाएंगे. उधर डीके शिवकुमार ने सोमवार शाम एक्स पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री को मंगलवार सुबह अपने घर नाश्ते के लिए आमंत्रित किया है, ताकि ‘कर्नाटक से किए वादों को पूरा करने के लिए सामूहिक प्रयासों को मज़बूत किया जा सके’.

खरगे ने क्या दिया संदेश?

पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार शाम साफ तौर पर संकेत दिया कि अब दो साल पुराने ‘पावर-शेयरिंग फार्मूले’ को लागू करने का समय आ गया है. खड़गे ने दोनों नेताओं को साफ कहा कि 2023 में उनकी मौजूदगी में कार्यकाल के बंटवारे को लेकर जो बात तय हुई थी, उसे अब सम्मान दिया जाना चाहिए.

नेतृत्व परिवर्तन में कहां फंसा पेंच?

सूत्रों के अनुसार, अगले 15 दिनों में डीके शिवकुमार को दिल्ली बुलाकर केंद्रीय नेतृत्व उनसे ‘ट्रांजिशन टाइमलाइन’ पर अंतिम बातचीत कर सकता है. हालांकि राहुल गांधी इस समय कार्यकाल के बीच में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं बताए जा रहे हैं, जो इस पैकेज का सबसे बड़ा पेच है.

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क्या है Karnataka के 2.5 साल का पचड़ा?

दावा किया जा रहा है कि कर्नाटक (Karnataka Election) में कांग्रेस की जीत के बाद डीके शिवकुमार का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए आगे थे. हालांकि, पुराने नेता सिद्दारमैया ने इसपर विटो लगा दिया था. इसके बाद दोनों पक्षों में 2.5 साल के लिए समझौता हुआ था. अब इसी के आधार पर डीके शिवकुमार के समर्थ अपने नेता को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं.



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