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JDU में ‘त्यागी युग’ का अंत: केसी त्यागी ने नीतीश का साथ छोड़ वापस थामी यूपी की राह, क्या भारत रत्न की मांग बनी इस्तीफे की वजह?

जेडीयू के वरिष्ठ नेता K.C. Tyagi ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़कर सियासी हलचल तेज कर दी है. Nitish Kumar को ‘भारत रत्न’ देने की मांग पर पार्टी की चुप्पी को इस्तीफे की बड़ी वजह माना जा रहा है…

KC Tyagi resignation: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद साथियों में शुमार और जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे केसी त्यागी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे कर सबको चौंका दिया है. त्यागी ने न केवल इस्तीफा दिया, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि वे भविष्य में अपनी सदस्यता रिन्यू नहीं कराएंगे. गाजियाबाद के रहने वाले किशन चंद त्यागी (केसी त्यागी) ने पिछले 50 सालों से भारतीय राजनीति में अपनी एक अलग धमक बनाए रखी थी.

पश्चिमी यूपी से ताल्लुक रखने के बावजूद उन्होंने लंबे समय तक बिहार की सियासत को दिल्ली के गलियारों में मजबूती से रखा, लेकिन अब उनके इस फैसले से जेडीयू को एक बड़ा वैचारिक और रणनीतिक झटका लगा है. चर्चा है कि वे अब वापस उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होने का मन बना चुके हैं.

केसी त्यागी की नाराजगी की क्या है इनसाइड स्टोरी?

केसी त्यागी के इस्तीफे के पीछे की सबसे बड़ी वजह उनकी हालिया नाराजगी मानी जा रही है. दरअसल त्यागी ने सार्वजनिक रूप से नीतीश कुमार को ‘भारत रत्न’ देने की पुरजोर मांग की थी. उन्होंने तर्क दिया था कि जिस तरह चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर को यह सम्मान मिला, उसी तर्ज पर नीतीश कुमार भी इसके हकदार हैं.

लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि खुद जेडीयू ने ही उनकी इस मांग को तवज्जो नहीं दी और इसे नजरअंदाज कर दिया. पार्टी के इस ठंडे रुख ने त्यागी को अंदर तक आहत कर दिया, जिसके बाद से ही उनके बागी सुर सुनाई देने लगे थे. राजनीति के जानकारों का मानना है कि सम्मान न मिलने और अपनी ही पार्टी में अलग-थलग पड़ने के कारण उन्होंने यह कड़ा कदम उठाया.

लोहियावादी सिपाही से नीतीश के सारथी तक का सफर

1970 के दशक में राजनीति की शुरुआत करने वाले केसी त्यागी एक मंझे हुए नेता रहे हैं. 1977 में युवा जनता पार्टी से शुरू हुआ उनका सफर जनता दल और समाजवादी पार्टी से होता हुआ जेडीयू तक पहुंचा. 1989 में हापुड़ से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचने वाले त्यागी ने 1994 में मुलायम सिंह यादव की सपा में राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी भी संभाली थी.

साल 2013 में जब वे जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने, तो उन्होंने नीतीश कुमार की नीतियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई. नीतीश ने भी उन्हें राज्यसभा भेजकर उनका मान बढ़ाया था. लेकिन पिछले कुछ समय से ‘निजी कारणों’ का हवाला देकर पदों से दूरी बनाना और अब सदस्यता छोड़ना, यह दर्शाता है कि जेडीयू के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है.

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आगे का क्या है प्लान?

केसी त्यागी के अगले कदम को लेकर अटकलें तेज हैं. उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वे अब अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश में वापस लौटना चाहते हैं. पश्चिमी यूपी में जाट और त्यागी बाहुल्य सीटों पर उनकी पकड़ आज भी मजबूत है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वे एक बार फिर समाजवादी पार्टी का रुख करेंगे या फिर बीजेपी के साथ उनकी नई केमिस्ट्री देखने को मिलेगी?

फिलहाल त्यागी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन जेडीयू से उनके मोहभंग ने बिहार से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे दिया है. नीतीश कुमार के लिए अपने एक पुराने और अनुभवी साथी को खोना आने वाले चुनावों में बड़ी चुनौती साबित हो सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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