आज के दौर में सोशल मीडिया पर ‘लाइक’ और ‘व्यूज’ पाने की होड़ किस कदर जानलेवा साबित हो सकती है, इसकी एक खौफनाक मिसाल केरल के कोझिकोड से सामने आई है. यहां एक महिला इंफ्लुएंसर की सनक ने एक बेगुनाह शख्स को मौत के गले लगाने पर मजबूर कर दिया. जिस शख्स को दुनिया ने वीडियो देखकर ‘गुनेहगार’ मान लिया था, असल में वह पूरी तरह निर्दोष निकला. अब पुलिस ने इस मामले में आरोपी महिला इंफ्लुएंसर शिमजिथा मुस्तफा को गिरफ्तार कर लिया है.
क्या था ‘डेथ वीडियो’?
जब शिमजिथा एक निजी बस में सफर कर रही थी. उसी बस में 42 वर्षीय यू. दीपक भी मौजूद थे. शिमजिथा ने अचानक दीपक का वीडियो बनाना शुरू किया और उन पर यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगा दिया. उसने बिना पुलिस को सूचना दिए, इस वीडियो को सीधे अपने सोशल मीडिया हैंडल पर डाल दिया.
सिर्फ 48 घंटों के भीतर उस वीडियो को 20 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा और हजारों बार शेयर किया गया. इसके बाद सोशल मीडिया पर दीपक का ‘पब्लिक ट्रायल’ शुरू हो गया. लोग उन्हें भद्दे कमेंट्स और गालियां देने लगे. दीपक ने जब खुद को इस तरह सरेआम जलील होते देखा, तो वह टूट गए. बदनामी का यह बोझ इतना भारी था कि उन्होंने अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी.
CCTV ने खोला पोल
दीपक की मौत के बाद जब पुलिस ने मामले की गहराई से जांच की, तो सारा सच शीशे की तरह साफ हो गया. पुलिस ने उस बस के सीसीटीवी फुटेज निकाले और बस के स्टाफ से पूछताछ की. फुटेज में साफ दिखा कि दीपक ने ऐसी कोई हरकत नहीं की थी जैसा दावा वीडियो में किया गया था. बस कर्मचारियों ने भी गवाही दी कि महिला के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद थे.
पुलिस की कार्रवाई
बेटे को खोने के बाद दीपक के माता-पिता ने शिमजिथा के खिलाफ कड़ी शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने जब दबाव बनाया तो शिमजिथा फरार हो गई और अपना फोन बंद कर लिया. वह अग्रिम जमानत के लिए हाथ-पैर मार रही थी, लेकिन पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे बुधवार को गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल, पुलिस उसके फोन और अन्य गैजेट्स की जांच कर रही है.
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– भारत एक्सप्रेस
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