मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फोटो X)
केंद्र सरकार ने जैसे ही केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई, बंगाल की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस फैसले से नाराज दिखीं और उन्होंने केंद्र सरकार पर पॉलिटिकल भेदभाव का आरोप लगा दिया. ममता ने सवाल किया की अगर केरल के लिए नियम आसान हो सकते हैं, तो फिर पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘बांग्ला’ करने का प्रस्ताव पिछले कई सालों से ठंडे बस्ते में क्यों पड़ा है?
ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ते हुए केंद्र को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार असल में बंगाल विरोधी है. इसलिए हमारे हर प्रस्ताव को जानबूझकर नजरअंदाज किया जाता है. उन्होंने राजनीतिक आरोप लगाते हुए यह भी कह दिया कि केरल में सीपीएम (CPIM) और बीजेपी के बीच अंदरूनी सेटिंग है, शायद इसीलिए वहां का रास्ता इतनी आसानी से साफ कर दिया गया.
ममता का मानना है कि चूंकि बंगाल की सरकार दिल्ली के सामने झुकने को तैयार नहीं है, इसलिए राज्य की जनता और यहां की संस्कृति की मांगों को दबाया जा रहा है.
‘बांग्ला’ प्रस्ताव अब तक क्यों नहीं हुआ मंजूर?
यह विवाद आज का नहीं है. जुलाई 2018 में ही पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास किया था कि राज्य का नाम बदलकर बांग्ला कर दिया जाए. टीएमसी का तर्क साफ है. वे चाहते हैं कि राज्य का नाम उसकी पहचान और महान संस्कृति के अनुरूप हो. हाल ही में, फरवरी 2025 में भी टीएमसी सांसद ऋतब्रत बनर्जी ने राज्यसभा में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था.
टीएमसी का कहना है कि विधानसभा से प्रस्ताव पास होने के बाद भी गृह मंत्रालय ने इसे अब तक मंजूरी क्यों नहीं दी, यह समझ से परे है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर तृणमूल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को सीधे निशाने पर लिया. पार्टी ने लिखा कि चुनाव के दौरान तो बीजेपी के बड़े नेता बंगाल की संस्कृति और महापुरुषों के प्रति बहुत प्यार दिखाते हैं, लेकिन जब असली सम्मान देने की बात आती है, तो वे पीछे हट जाते हैं.
टीएमसी ने इसे बंगाल की अस्मिता का अपमान बताते हुए कहा कि किसी भी राज्य की पहचान के साथ इस तरह का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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