Lawrence Bishnoi Gang Encounter: देश के सबसे कुख्यात और खूंखार लॉरेंस बिश्नोई गैंग को एक बार फिर कानून से हार का सामना करना पड़ा है. दरअसल हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ में बीती रात दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और हरियाणा एसटीएफ (STF) के संयुक्त चक्रव्यूह में लॉरेंस गैंग के दो सबसे लाडले और खूंखार शार्प शूटरों का अंत हो गया. मारे गए बदमाशों की पहचान हिसार के टिब्बा दानाशेर निवासी प्रवेश और जाखोड़ खेड़ा निवासी हिमांशु के रूप में हुई है, जिन्हें लॉरेंस बिश्नोई गैंग का बेहद भरोसेमंद और ‘जिगर का छल्ला’ माना जाता था.
इन दोनों ही बदमाशों की क्राइम कुंडली इस कदर खौफनाक थी कि सरकार ने इन पर एक-एक लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित कर रखा था. लेकिन बहादुरगढ़ का बालौर बाईपास इस बार इन दोनों अपराधियों के पाप के घड़े के फूटने का गवाह बना, जहां पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दोनों हमेशा-हमेशा के लिए शांत हो गए.
कौन थे प्रवेश और हिमांशु?(Lawrence Bishnoi Gang Encounter)
बता दें कि एनकाउंटर में ढेर हुए इन दोनों शूटरों की पहचान पूरी तरह से साफ हो चुकी है. इनमें से एक प्रवेश था, जो हिसार के तिब्बा दानाशेर का रहने वाला था और उसका पिता जय प्रकाश है. वहीं दूसरा शूटर हिमांशु था, जो हिसार जिले के ही गांव जाखोद खेड़ा का रहने वाला था और उसके पिता का नाम सुशील कुमार है. ये दोनों आम ग्रामीण बैकग्राउंड से निकलकर बहुत ही कम समय में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सबसे चहेते और खूंखार शूटर बन चुके थे.
गैंग के बड़े आकाओं के इशारे पर रंगदारी वसूलना, विरोधी गैंग्स पर गोलियां बरसाना और सरेआम कत्ल की वारदातों को अंजाम देना इनका पेशा बन चुका था. हिसार से लेकर पूरे दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में इनका खौफ इस कदर बढ़ रहा था कि अंडरवर्ल्ड में इन्हें लॉरेंस गैंग के सबसे घातक मोहरों के रूप में देखा जाने लगा था.
हांसी का वो चर्चित जिम संचालक मर्डर केस
हिमांशु और प्रवेश की उल्टी गिनती दरअसल उसी दिन से शुरू हो गई थी, जब इन्होंने 11 जून 2026 को हरियाणा के हांसी में दिनदहाड़े एक बड़ी वारदात को अंजाम दिया था. दोनों आरोपी थाना सिटी हांसी में दर्ज एफआईआर संख्या 379 के तहत वांछित थे, जो हांसी के चर्चित जिम संचालक कपिल की बेरहम हत्या से जुड़ा हुआ था. कपिल की सरेआम गोली मारकर हत्या करने के बाद से ही ये दोनों पुलिस की रडार पर थे.
पुलिस को पुख्ता और सटीक खुफिया इनपुट मिला था कि ये दोनों शूटर अत्याधुनिक हथियारों से लैस होकर बहादुरगढ़ के रास्ते किसी अन्य बड़ी और सनसनीखेज आपराधिक वारदात को अंजाम देने के इरादे से आगे बढ़ रहे हैं. इस सूचना के मिलते ही हरियाणा पुलिस की एसटीएफ बहादुरगढ़ और दिल्ली पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस स्पेशल सेल ने बालौर बाईपास पर अपना अभेद्य जाल बिछा दिया.
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कैसे हुआ एनकाउंटर?
बालौर बाईपास पर जैसे ही संयुक्त सुरक्षा घेरे को देखकर इन बदमाशों को अपने घिरने का अहसास हुआ, उन्होंने सरेंडर करने के बजाय पुलिस पर ही सीधे ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. आत्मरक्षार्थ में पुलिस टीम ने भी मोर्चा संभाला और दोनों ओर से करीब 12 से 13 राउंड दनादन फायरिंग हुई. बदमाशों की तरफ से चलाई गई कई गोलियां सीधे चार पुलिसकर्मियों की बुलेटप्रूफ जैकेट से टकराईं, जिससे उनकी जान तो बच गई, लेकिन इस खूनी मुठभेड़ के दौरान पुलिस का एक कांस्टेबल गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे तुरंत हायर मेडिकल सेंटर रेफर किया गया.
वहीं पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दोनों वांछित शूटर बुरी तरह जख्मी हो गए, जिन्होंने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. इस एनकाउंटर के बाद पुलिस ने साफ कर दिया है कि लॉरेंस गैंग के पालतू गुर्गों का यही अंजाम होने वाला है.
-भारत एक्सप्रेस
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