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केतन अग्रवाल केस के बाद बढ़ी सुरक्षा की चर्चा, लोहागढ़ घूमने जा रहे हैं तो पहले जान लें ये जरूरी बातें

Lohagad Fort travel tips: केतन अग्रवाल मर्डर केस के बाद महाराष्ट्र के लोहागढ़ किले और ट्रैकिंग डेस्टिनेशन्स की सुरक्षा पर चर्चा तेज हो गई है. अगर आप मानसून में लोहागढ़ फोर्ट घूमने की योजना बना रहे हैं, तो खूबसूरती के साथ जरूरी सुरक्षा उपायों और ट्रैकिंग टिप्स को जानना बेहद जरूरी है।.

Lohagad Fort travel tips

Lohagad Fort travel tips

Lohagad Fort travel tips:  हाल ही में सामने आए केतन अग्रवाल मर्डर केस ने हर किसी को हैरान कर दिया. इस घटना के बाद एक बार फिर पहाड़ी इलाकों, ट्रैकिंग डेस्टिनेशन्स और लोहागढ़ फोर्ट पर सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है. इसी बीच अगर आप महाराष्ट्र के मशहूर लोहागढ़ किले पर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो वहां की खूबसूरती के साथ-साथ कुछ जरूरी सावधानियां जान लेना भी बेहद जरूरी है. समुद्र तल से लगभग 1033 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह ऐतिहासिक लोहागढ़ fORT मानसून के मौसम में किसी जादुई दुनिया से कम नहीं लगता.चारों तरफ फैले बादल, हरी-भरी पहाड़ियां और ठंडी हवाएं यहां आने वाले हर व्यक्ति का दिल जीत लेती हैं. ऊपर पहुंचकर नीचे का नजारा इतना शानदार दिखाई देता है कि हर थकान पलभर में गायब हो जाती है.

लोहागढ़ किला की खासियत

लोहागढ़ किला सिर्फ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि अपने मजबूत निर्माण और ऐतिहासिक महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है. माना जाता है कि इसका निर्माण सातवाहन काल में हुआ था और बाद के समय में इस पर कई राजवंशों का शासन रहा. इतिहासकारों के अनुसार, यह किला रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण था. स्थानीय लोगों के बीच यह भी मान्यता है कि यहां कभी विशाल खजाना छिपाकर रखा गया था, जिसकी कहानियां आज भी लोगों की उत्सुकता बढ़ा देती हैं.

 छत्रपति शिवाजी महाराज से भी है लोहागढ़ किले का संबंध

एक और दिलचस्प बात यह है कि इस किले का संबंध छत्रपति शिवाजी महाराज से भी जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि उन्होंने इस किले का उपयोग अपने सैन्य अभियानों के दौरान किया था. हालांकि, यह दावा कि उन्होंने अपने जीवन के कई वर्ष यहीं बिताए, ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जाता. फिर भी, शिवाजी महाराज के इतिहास से जुड़ाव इस किले की लोकप्रियता को और बढ़ा देता है. लोहागढ़ का सबसे आकर्षक हिस्सा है इसका मशहूर विंचुकाटा, जिसका आकार बिच्छू की पूंछ जैसा दिखाई देता है. यही वजह है कि इसे विंचुकाटा कहा जाता है. यहां से आसपास की घाटियों और पहाड़ियों का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है. मानसून में जब बादल इस हिस्से को अपनी चादर से ढक लेते हैं, तब यह जगह किसी फिल्मी दृश्य जैसी लगने लगती है.

घूमने जाने से पहले जरुर लें मौसम का अपडेट

लेकिन जितनी खूबसूरत यह जगह है, उतनी ही सावधानी भी यहां जरूरी है. अगर आप मानसून में ट्रैकिंग का प्लान बना रहे हैं, तो सबसे पहले मौसम का अपडेट जरूर चेक करें. लगातार या तेज बारिश के दौरान यहां की पगडंडियां बेहद फिसलन भरी हो जाती हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा काफी बढ़ जाता है. ऐसे मौसम में यात्रा टाल देना ही बेहतर फैसला साबित हो सकता है. ट्रैकिंग के लिए हमेशा मजबूत ग्रिप वाले स्पोर्ट्स शूज पहनें. साधारण जूते फिसल सकते हैं और चोट का कारण बन सकते हैं. कोशिश करें कि अकेले ट्रैकिंग पर न जाएं. ग्रुप में यात्रा करना ज्यादा सुरक्षित रहता है क्योंकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सकती है. यदि किसी कारणवश अकेले जा रहे हैं, तो अपने परिवार या दोस्तों को अपनी यात्रा की पूरी जानकारी जरूर दें.

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ट्रैकिंग के दौरान सेल्फी लेने से बचें

किले की ऊंची दीवारों और गहरी खाइयों के किनारे जाने से बचें. खासकर सेल्फी लेने के लिए जोखिम बिल्कुल न उठाएं. सोशल मीडिया पर एक तस्वीर से कहीं ज्यादा कीमती आपकी सुरक्षा और जिंदगी है. इसलिए रोमांच का आनंद लें, लेकिन जिम्मेदारी के साथ.यात्रा पर निकलने से पहले अपने बैग में पीने का पर्याप्त पानी, फर्स्ट-एड किट और मोबाइल के लिए पावर बैंक जरूर रखें. ये छोटी-छोटी तैयारियां मुश्किल समय में बहुत काम आती हैं और आपकी ट्रैकिंग को सुरक्षित और आरामदायक बनाती हैं. अगर आप इतिहास, रोमांच और प्रकृति—तीनों का अनोखा संगम एक ही जगह देखना चाहते हैं, तो लोहागढ़ किला आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होना चाहिए.

भारत एक्सप्रेस



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