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होर्मुज की खाड़ी को पार कर भारत आ रहे हैं 92,600 टन एलपीजी से लदे जहाज: मोदी सरकार

दो भारतीय एलपीजी जहाज, पाइन गैस और जग वसंत, सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं. सरकार ने कहा कि वैश्विक तेल संकट के बीच देशवासियों को सुरक्षित रखने के लिए हर कदम उठाया जा रहा है.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

केंद्र सरकार ने आज (मंगलवार) को पुष्टि की है कि ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ नाम के दो बड़े एलपीजी जहाज सुरक्षित तरीके से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार कर चुके हैं और अब तेजी से भारत की ओर बढ़ रहे हैं. यह क्षेत्र हाल ही में तनाव का केंद्र रहा है.

कब और कहां पहुंचेंगे ये जहाज?

शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा के मुताबिक, इन जहाजों के आने से देश में रसोई गैस की आपूर्ति और मजबूत होगी. जग वसंत जहाज कुवैत से 47,600 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आ रहा है और इसके 26 मार्च तक गुजरात के कांडला पोर्ट पहुंचने की उम्मीद है तथा पाइन गैस यूएई के रुवैस से 45,000 मीट्रिक टन गैस लोड करके निकला यह जहाज 27 मार्च को न्यू मैंगलोर पोर्ट पर पहुंचेगा.

इस रास्ते को पार करने में लगभग 14 घंटे लगते हैं, लेकिन इलाके में जारी तनाव की वजह से सुरक्षा को लेकर काफी चिंताएं थीं. फिलहाल, 20 और भारतीय जहाज उसी क्षेत्र के पश्चिमी हिस्से में मौजूद हैं, जिन पर सरकार की पैनी नजर बनी हुई है.

भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर जोर

दरअसल, फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में माहौल काफी गरमा गया था. होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री रास्तों पर आवाजाही मुश्किल हो गई थी. ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’ भी इसी वजह से कुछ समय के लिए फंस गए थे. लेकिन अब ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद इनका रास्ता साफ हो गया है. इस महीने की शुरुआत में भी दो भारतीय जहाज इसी तरह सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे थे.

इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में देश को संबोधित करते हुए एक बहुत बड़ी बात कही. उन्होंने साफ किया कि सरकार ग्लोबल ऑयल संकट के असर से आम आदमी को बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है.

प्रधानमंत्री ने इस बात पर चिंता जताई कि आज भी भारत का 90 प्रतिशत व्यापार विदेशी जहाजों के भरोसे चलता है. उन्होंने कहा,

“अगर दुनिया में कहीं भी युद्ध छिड़ता है या संकट आता है, तो दूसरों पर हमारी यह निर्भरता हमें मुश्किल में डाल सकती है. इसका इकलौता समाधान ‘आत्मनिर्भरता’ है.”

70,000 करोड़ का बड़ा दांव

ग्लोबल झटकों से देश की अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन को बचाने के लिए सरकार अब ‘मेक इन इंडिया’ पर फोकस कर रही है. पीएम मोदी ने बताया कि सरकार करीब 70,000 करोड़ रुपये की लागत से भारतीय जहाजों के निर्माण और उनकी क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है.

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-भारत एक्सप्रेस



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