₹1.86 लाख करोड़ का मास्टरस्ट्रोक! भारत को ग्रीन एनर्जी हब बनाने के लिए मोदी सरकार का बड़ा ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज़-III (GEC-III) स्कीम को मंज़ूरी दे दी है. यह ऐतिहासिक पहल भारत के इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (InSTS) को मज़बूत करेगी, जिससे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट (GW) तक रिन्यूएबल एनर्जी की निकासी हो सकेगी.
यूरेनियम से LNG तक! मोदी सरकार में भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ ऐतिहासिक ऊर्जा समझौता
India Australia Defense Partnership: भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में अहम समझौते किए. डिफेंस इनोवेशन कॉरिडोर, मैरीटाइम सिक्योरिटी रोडमैप और यूरेनियम सप्लाई एग्रीमेंट से दोनों देशों की साझेदारी और मजबूत होगी.
भारत और यूएई के बीच हुए समझौते दोनों देशों के रिश्तों को और अधिक मजबूती देंगे: पीएम मोदी
भारत और यूएई के बीच ऊर्जा, रक्षा, टेक्नोलॉजी और निवेश समेत 7 बड़े समझौते हुए. पीएम मोदी ने इन्हें रिश्तों के लिए अहम बताया.
होर्मुज की खाड़ी को पार कर भारत आ रहे हैं 92,600 टन एलपीजी से लदे जहाज: मोदी सरकार
दो भारतीय एलपीजी जहाज, पाइन गैस और जग वसंत, सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं. सरकार ने कहा कि वैश्विक तेल संकट के बीच देशवासियों को सुरक्षित रखने के लिए हर कदम उठाया जा रहा है.
IEA Energy Plan: कोरोना महामारी के बाद दुनिया में सबसे बड़े ‘लॉकडाउन’ की आहट, भारत कैसे बचेगा इस संकट से?
दुनिया में कोविड के बाद एक बार फिर सबसे बड़ा लॉकडाउन आ सकता है. तेल संकट को भांपते हुए IEA ने कोविड स्टाइल प्लान जारी किया. यात्रा कम करने, राशनिंग शुरू करने पर फोकस, क्योंकि तेल-गैस की कमी से दुनिया में कोहराम मचेगा.
विकसित भारत 2047 की राह में कोयला निभाएगा अहम भूमिका, पीएम मोदी का बड़ा बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि कोयला विकसित भारत 2047 की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा. उन्होंने बताया कि कोयला क्षेत्र ग्रीन टेक्नोलॉजी के साथ खुद को ढाल रहा है. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने रिकॉर्ड कोयला उत्पादन किया है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हुई है.
भारत का कड़ा जवाब: ट्रंप द्वारा भारत पर भारी टैरिफ लगाने के मामले पर अब तक का सबसे सख्त बयान
रूस से तेल आयात को लेकर भारत पर की जा रही पश्चिमी आलोचनाओं के बीच भारत ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय उसकी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है. भारत ने कहा कि जो देश उसकी आलोचना कर रहे हैं, वे खुद भी रूस के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार कर रहे हैं.







