महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता अजित पवार (Ajit Pawar) का बुधवार सुबह बारामती में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया. वह जिला परिषद चुनाव प्रचार के लिए बारामती जा रहे थे. लैंडिंग के दौरान विमान क्रैश हो गया. विमान में कुल पांच लोग मौजूद थे, जिनमें से अजित पवार गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनकी मौत हो गई. हादसा सुबह करीब 8:45 बजे हुआ.
राजनीति में लंबा सफर
अजित पवार (Ajit Pawar) ने अपने चाचा शरद पवार के मार्गदर्शन में राजनीति की शुरुआत की थी. चार दशक से भी अधिक समय तक वे महाराष्ट्र की राजनीति का अहम चेहरा बने रहे. वे राज्य के आठवें उपमुख्यमंत्री थे और अलग-अलग सरकारों में कई विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके थे.
चाचा-भतीजे का रिश्ता
हालांकि 2022 में राजनीतिक मतभेदों के चलते अजित पवार (Ajit Pawar) ने अपने चाचा शरद पवार से अलग रास्ता चुना और पार्टी दो हिस्सों में बंट गई. इसके बावजूद निजी रिश्तों में दोनों के बीच संवाद बना रहा. हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में दोनों ने मिलकर पुणे नगर निगम में साथ चुनाव लड़ा था.
लोकसभा से विधानसभा तक
अपने समर्थकों के बीच ‘दादा’ के नाम से मशहूर अजित पवार (Ajit Pawar) ने 1980 के दशक में राजनीति में कदम रखा. 1991 में उन्होंने पहली बार बारामती लोकसभा सीट जीती. बाद में उन्होंने यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए छोड़ दी. उसी साल वे बारामती विधानसभा सीट से विधायक बने और लगातार आठ बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने 1991 से लेकर 2024 तक हर चुनाव में जीत दर्ज की.
पहली बार मंत्री बने
1991 में उन्हें सुधाकरराव नाइक की सरकार में कृषि और बिजली राज्य मंत्री बनाया गया. 1992 में शरद पवार के मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें (Ajit Pawar) मृदा संरक्षण और योजना विभाग की जिम्मेदारी मिली. 1999 में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार में वे सिंचाई मंत्री बने. 2003 में सुशील कुमार शिंदे की कैबिनेट में ग्रामीण विकास मंत्री रहे. 2004 के चुनावों के बाद वे जल संसाधन मंत्री बने और कई अहम फैसलों में शामिल रहे.
उपमुख्यमंत्री के रूप में भूमिका
2010 में अजित पवार (Ajit Pawar) पहली बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने. वे राज्य के आठवें उपमुख्यमंत्री थे और सात बार इस पद पर रहे. करीब आठ साल तक उन्होंने उपमुख्यमंत्री का पद संभाला. उनकी लोकप्रियता बारामती में लगातार बनी रही. 2019 में उन्होंने 1.65 लाख वोटों से जीत दर्ज की, जबकि 2024 में भी उन्होंने एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की.
बगावत और रिश्ते
अजित पवार (Ajit Pawar) को हमेशा लगता रहा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका नहीं दिया गया. उनका मानना था कि 2004 से शरद पवार ने उन्हें बार-बार अवसर से वंचित किया. इसी कारण 2022 में उन्होंने बगावत की और पार्टी दो हिस्सों में बंट गई.
महायुति सरकार में भूमिका
2022 में शिवसेना में फूट पड़ने के बाद उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई. बीजेपी ने एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाकर महायुति सरकार बनाई, जिसमें अजित पवार (Ajit Pawar) उपमुख्यमंत्री बने. हालांकि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद वे अपने चाचा शरद पवार से व्यक्तिगत रूप से जुड़े रहे. वे अक्सर उनसे मिलने जाते और आशीर्वाद लेते थे.
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अजित पवार (Ajit Pawar) का निधन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बड़ा नुकसान है. चार दशक से अधिक समय तक उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई. उनका जाना न केवल एनसीपी बल्कि पूरे महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य के लिए गहरी क्षति है.
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