Bharat Express DD Free Dish

बिहार में दर्दनाक हादसा: गंगा में समाया विक्रमशिला सेतु का पिलर, ताश के पत्तों की तरह ढहा स्लैब; बाल-बाल बची हजारों जानें!

Vikramshila Setu Collapse: बिहार के भागलपुर में रविवार की देर रात एक बड़ा हादसा हो गया. नवगछिया और भागलपुर को जोड़ने वाला प्रसिद्ध विक्रमशिला सेतु का पिलर नंबर 133 अचानक ध्वस्त हो गया, जिससे उस पर टिका स्लैब (स्पैन) सीधे गंगा नदी में जा गिरा. हालांकि, जान-माल का नुकसान नहीं हुआ,

Vikramshila Bridge Pillar 133

Vikramshila Setu Collapse: भागलपुर में गंगा नदी पर बने 4.7 किमी लंबे विक्रमशिला सेतु का पिलर नंबर 133 ध्वस्त होने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है. पुलिस की त्वरित कार्रवाई से रात में आवाजाही रोक दी गई, जिससे बड़ी जनहानि टल गई. पुल के कमजोर होने की सूचना पहले से थी, लेकिन मरम्मत न होने के कारण यह हादसा हुआ. फिलहाल उत्तर और दक्षिण बिहार का संपर्क कट चुका है.

आधी रात को हुआ हादसा: बाल-बाल बचे वाहन

हादसे की आहट रविवार रात करीब 11:33 बजे ही मिल गई थी, जब पिलर नंबर 133 अचानक धंसने लगा. रात 11:55 बजे तक पिलर काफी झुक गया था. मौके पर मौजूद पुलिस जवानों ने तुरंत इसकी जानकारी वरीय अधिकारियों को दी. भागलपुर रेंज के आईजी के निर्देश पर तत्काल प्रभाव से आवाजाही रोक दी गई. आखिरकार, रात 1:10 बजे पुल का वह हिस्सा जोरदार आवाज के साथ गंगा में विलीन हो गया.

विक्रमशिला सेतु: उत्तर और दक्षिण बिहार की लाइफलाइन

साल 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा उद्घाटित यह पुल लगभग 4.7 किलोमीटर लंबा है. यह पुल न केवल भागलपुर और नवगछिया को जोड़ता है, बल्कि बिहार के एक बड़े हिस्से को झारखंड से जोड़ने का भी मुख्य माध्यम है. प्रतिदिन यहाँ से हजारों भारी वाहन और एक लाख से अधिक लोग गुजरते हैं. पुल टूटने से अब यातायात पूरी तरह ठप हो गया है.

प्रशासनिक कार्रवाई और यातायात में बदलाव

हादसे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. भागलपुर शहर में भारी वाहनों का दबाव न बढ़े, इसके लिए घोंघा, सबौर, जगदीशपुर और कजरेली जैसे इलाकों में ही ट्रैफिक को रोक दिया गया है. भागलपुर एसएसपी और नवगछिया एसपी मौके पर कैंप कर रहे हैं और लोगों को क्षतिग्रस्त पुल के पास न जाने की हिदायत दी जा रही है.

क्या लापरवाही बनी हादसे की वजह?
स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों के बीच पुल के रख-रखाव पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. बताया जा रहा है कि पिलर की **प्रोटेक्शन वॉल** एक महीने पहले ही टूट गई थी, लेकिन मरम्मत की अनदेखी की गई. पिछले 8 सालों से पुल की कोई बड़ी मरम्मत नहीं हुई थी, जिसके कारण पिलर नंबर 133 कमजोर हो गया था. यह हादसा भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता की ओर भी इशारा कर रहा है.

यह भी पढ़ें: बंगाल में वोटों की गिनती…और मुंबई में बरसे नोट! सेंसेक्स 900 अंक पार, क्या चुनाव के नतीजे लगाएंगे शेयर मार्केट की नैया पार?

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read