TMC rebellion: पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक दबदबा बनाए रखने वाली ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अब गंभीर संकट से गुजर रही है. लगातार नेता पार्टी छोड़ रहे हैं और बगावत का दौर तेज़ हो गया है. खबरों के मुताबिक, 60 से ज्यादा विधायक पार्टी से किनारा कर चुके हैं. दिल्ली में बैठे लोकसभा सांसद भी अब खुलकर विरोध का झंडा उठा रहे हैं.
कल्याण बनर्जी का अल्टीमेटम
सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ममता बनर्जी के भरोसेमंद नेता कल्याण बनर्जी ने ही विद्रोही तेवर दिखा दिए. ममता ने हाल ही में उन्हें चीफ व्हिप बनाया था और इसके लिए 40 साल पुरानी सहयोगी काकोली घोष को हटाया था. लेकिन अब वही कल्याण बनर्जी कह रहे हैं कि ममता को तय करना होगा या तो अभिषेक बनर्जी को हटाएं या फिर वफादार नेताओं को साथ रखें.
अभिषेक बनर्जी पर सीधा हमला
कल्याण बनर्जी ने साफ कहा कि अभिषेक बनर्जी पर उन्हें कभी भरोसा नहीं रहा. उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी हस्ताक्षर केस में वकील बदलने का फैसला आधी रात को उन्हें बताया गया, जो बेहद अपमानजनक था. उन्होंने कहा कि उन्हें डस्टबिन की तरह ट्रीट किया गया. कल्याण ने अभिषेक को घमंडी बताया और सवाल उठाया कि आखिर वह हैं कौन. उनके मुताबिक, अभिषेक की वजह से पार्टी को नुकसान हुआ है.
दीदी से वफादारी
कल्याण बनर्जी ने यह भी कहा कि वह ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं, लेकिन अब दीदी को फैसला करना होगा कि उन्हें पार्टी और वफादार नेता चाहिए या फिर परिवार और बच्चा. उनका यह बयान पार्टी के भीतर गहरी दरार का संकेत देता है.
ताबूत में आखिरी कील?
कल्याण बनर्जी की गिनती ममता के सबसे भरोसेमंद नेताओं में होती रही है. चुनावी हार के बाद भी उन्होंने कोर्ट में कई अहम मामलों की पैरवी की. यही वजह है कि उनका विद्रोह टीएमसी के लिए ताबूत में आखिरी कील माना जा रहा है.
लगातार झटके
कल्याण के बागी रुख से कुछ घंटे पहले ही ममता को दो बड़े झटके लगे. प्रकाश चिक बराइक ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया. वहीं, प्रसून बनर्जी भी काकोली घोष के गुट में शामिल हो गए और लोकसभा में अलग गुट की मान्यता की मांग वाले पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए.
ये भी पढ़ें-दिल्ली में सनसनी: गुरु रंधावा के जिम के बाहर फायरिंग, लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से वायरल हुआ दावा
बिखरती हुई पार्टी
लगातार नेताओं का पार्टी से अलग होना इस बात का संकेत है कि टीएमसी अब गंभीर संकट में है. ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह पार्टी को एकजुट कैसे रखें. कल्याण बनर्जी का खुला विद्रोह इस संकट को और गहरा कर रहा है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


