पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में पिछले काफी समय से जारी तनाव के बीच सुरक्षा बलों ने हथियारों की तस्करी और एक बहुत बड़ी हिंसक साजिश को नाकाम कर दिया है. दरअसल सेना, असम राइफल्स, सीआरपीएफ और मणिपुर पुलिस के एक संयुक्त और बेहद गोपनीय ऑपरेशन में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन यूएनएलएफ-पाम्बेई यानी UNLF(P) के गुप्त ठिकानों से 67 अत्याधुनिक हथियारों और बारूद का ऐसा खौफनाक जखीरा बरामद हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं.
बता दें कि इस बरामदगी (Manipur Arms Recovery Operation) ने एक बार फिर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अशांत मणिपुर में एंटी-ड्रोन जैमर, स्नाइपर राइफल और आरपीजी-7 जैसे खतरनाक मिलिट्री-ग्रेड हथियार कहां से आ रहे हैं और कौन सी बाहरी ताकतें इस राज्य को गृहयुद्ध की आग में झोंकना चाहती हैं?
मणिपुर में स्नाइपर, RPG, और एंटी-ड्रोन जैमर जैसे घातक हथियारों का पकड़ा जाना कोई सामान्य बात नहीं है। यह साफ इशारा है कि इसके पीछे ‘डीप स्टेट’ की कितनी बड़ी फंडिंग है! pic.twitter.com/EKOy8VDKhr
— Mrityunjay Sharma (@MrityunjayS7) May 21, 2026
ऑपरेशन की शुरुआत कैसे हुई?(Manipur Arms Recovery Operation)
बताते चलें इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत तब हुई जब सुरक्षा बलों ने खुफिया इनपुट के आधार पर यूएनएलएफ(पी) के दो सक्रिय सदस्यों, हेइशनाम थॉमस सिंह और अरंबम टॉमटॉम सिंह को धर दबोचा. लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब इन दोनों उग्रवादियों की गिरफ्तारी की कागजी प्रक्रिया चल ही रही थी, तभी उनके साथियों ने सुरक्षा बलों को चारों तरफ से घेरकर उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी.
सुरक्षा बलों ने भी तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई करते हुए संक्षिप्त मुठभेड़ के बाद हमला करने आए दो और खूंखार कार्यकर्ताओं, निंगथौजम राकेश सिंह और चिंगाखम महेश सिंह को जिंदा दबोच लिया. इन चारों से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उन्होंने मणिपुर में लूटे गए हथियारों की अवैध बिक्री और एक बड़े नेटवर्क का खुलासा कर दिया.
दो चरणों में बरामद हुआ मौत का सामान
गिरफ्तार उग्रवादियों के कबूलनामे के आधार पर सुरक्षा बलों ने बिना एक पल गंवाए इम्फाल वेस्ट के लामदेंग में स्थित यूएनएलएफ(पी) के एक अनधिकृत और गुप्त कैंप पर धावा बोल दिया. पहले चरण की छापेमारी में सुरक्षाकर्मियों ने वहां से एके-सीरीज और एम-सीरीज की घातक राइफलों समेत 29 अत्याधुनिक हथियार जब्त किए.
इसके बाद जब पूरे इलाके को कॉर्डन ऑफ करके सघन तलाशी अभियान (रैड) चलाया गया, तो उग्रवादियों के बंकरों से 38 और भारी हथियार बरामद हुए. इस जखीरे में सिर्फ बंदूकें नहीं थीं बल्कि एक स्नाइपर राइफल, कार्बाइन, शॉटगन, मोर्टार, रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG-7) लॉन्चर, आसमान से नजर रखने वाले ड्रोनों को मार गिराने वाला एंटी-ड्रोन जैमर और भारी मात्रा में आरडीएक्स व विस्फोटकों का विशाल भंडार शामिल था.
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आखिर कौन बन रहा मणिपुर का विलेन?
इतने बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के हथियारों का मिलना (Manipur Arms Recovery Operation) इस बात का पुख्ता सबूत है कि मणिपुर की हिंसा सिर्फ दो समुदायों का आंतरिक टकराव नहीं है बल्कि इसके तार सीमा पार बैठे हथियारों के बड़े सौदागरों से जुड़े हैं. डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि म्यांमार में जारी तख्तापलट और वहां मची अराजकता का फायदा उठाकर ड्रग्स और हथियारों के सिंडिकेट भारत विरोधी ताकतों के इशारे पर मणिपुर में लगातार हथियारों की सप्लाई कर रहे हैं.
जिस तरह से एंटी-ड्रोन जैमर्स का इस्तेमाल उग्रवादी कर रहे हैं, उससे साफ है कि उन्हें अत्याधुनिक तकनीकी ट्रेनिंग भी मिल रही है, जिसका मकसद भारतीय सेना और सुरक्षा बलों के ऑपरेशन्स को नाकाम करना और प्रदेश में अशांति का माहौल बनाए रखना है.
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-भारत एक्सप्रेस
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