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Manipur Food And Fuel Shortage: मणिपुर में कुकि और मैतई समुदाय के बीच चल रहे जातीय हिंसा अब एक जटिल और त्रिकोणीय रूप ले चुकी है. इस संघर्ष का असर अब सीधे वहां के लोगों के रसोई और जेब पर पड़ने लगा है, जिसमें कागंपोकी जिले की हालत सबसे बेकार है. कांगपोकि में पिछले एक महीने से बुनियादी जरूरतें जैसे राशन और जरूरी समानों की सप्लाई ठप हो चुकी है. वहीं, कालाबाजारी के चलते पेट्रोल 300 रुपए तो LPG 4000 रुपए तक पहुंच चुका है.
आखिर क्या है सप्लाई के ठप होने की वजह?
दरअसल, 2023 से जारी कुकि और मैतई समुदाय के चल रहे संघर्ष के बीच अब नागा समुदाय की भी शामिल हो गया है, जिससे ये तीन तरफा संघर्ष बन गया है. असल में कांगपोकि तक राशन पहुंचाने वाले प्रमुख रास्ते नागालैंड के दीमापुर से शुरू होकर या तो नागा बहुल सेनापति क्षेत्र से गुजरती है या फिर मैतई बहुल इंफाल से गुजरते है.
वहीं, मैतई और कुकि के जारी तनाव के साथ अब कुकि और नागा समुदाय के बीच भी तनाव पैदा हो गया है. इसकी शुरुआत बीते 13 मई को कांगपोकि में तीन कुकि-जो चर्च के लीडरों की हत्या से हुई, जिसके बाद दोनों समुदायों ने एक दूसरे के पक्ष के लोगों को बंधक बना लिया. हालात तब और भी बिगड़ गए जब नागा बंधकों के शव मिले.
इसके बाद नागा संगठनों ने कांगपोकी जाने वाले सभी मालवाहक ट्रकों और अन्य वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी. हालांकि ये नाकाबंदी हटा ली गई, लेकिन कुकि समुदाय के खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी जारी रही.
एक महीने से खाली हैं दुकानें
कांगपोकी के एक बड़े थोक व्यापारी ने बताया कि दुकानों में जो भी पुराना स्टॉक बचा था, उसे दुकानदारों ने राशनिंग करके एक महीने तक जैसे-तैसे चलाया ताकि लोग घबराकर ज्यादा सामान न खरीदें. लेकिन अब वो बैकअप भी पूरी तरह खत्म हो चुका है. दुकानों पर बेचने के लिए कुछ नहीं बचा है.
हालांकि, हाल ही में स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मदद से जैसे-तैसे चावल के 640 बोरे जिले में पहुंचाए गए, जिन्हें भारी अतिरिक्त किराए के कारण 1800 की जगह 2000 रुपये प्रति बोरे में बेचना पड़ा. राशन कार्ड धारकों के लिए गैस का एक ट्रक भी पहुंचा.
उखरुल में भी गहराया संकट
इस सप्लाई कट का सबसे जानलेवा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है. कांगपोकी जिला अस्पताल में बुनियादी सुविधाएं न के बराबर हैं. पहले गंभीर मरीजों को इंफाल या कोहिमा भेजा जाता था, लेकिन अब रास्ते बंद होने के कारण मरीजों को हर दो-तीन दिन में सेना के सुरक्षित काफिले और कड़े पहरे के बीच इंफाल के अस्पतालों में ले जाना पड़ रहा है.
नाकेबंदी की ये आंच सिर्फ कांगपोकी तक सीमित नहीं है, बल्कि नागा बहुल उखरुल जिला भी इसकी चपेट में है. उखरुल जाने वाला रास्ता कुकी बस्तियों से गुजरता है, जहां पिछले दिनों सुरक्षा बलों की सुरक्षा में जा रहे ट्रकों पर हमला हुआ था और एक ड्राइवर की जान चली गई थी. हालांकि पुलिस का दावा है कि उखरुल मार्ग पर अभी सेना की निगरानी में गाड़ियां आ-जा रही हैं, लेकिन मणिपुर के इस अंदरूनी ब्लॉकडाउन ने लाखों लोगों को दाने-दाने के लिए मोहताज कर दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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