Bharat Express DD Free Dish
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

विभाजन की विभीषिका और स्त्री-मन की अनकही व्यथा: बेदी की अमर कृति ‘लाजो’ का मंचन

नई दिल्ली में रंग महोत्सव के 25वें संस्करण में मास्क प्लेयर्स आर्ट ग्रुप ने वरिष्ठ निर्देशक चन्द्र शेखर शर्मा के निर्देशन में राजेंदर सिंह बेदी की कहानी लाजवंती पर आधारित नाटक “लाजो” प्रस्तुत किया.

नई दिल्ली: भारत रंग महोत्सव का 25वां संस्करण इस समय राष्ट्रीय राजधानी में रंगमंच प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है. इसी कड़ी में 13 फरवरी, 2026 को दिल्ली के ब्लैंक कैनवस सभागार में मास्क प्लेयर्स आर्ट ग्रुप ने वरिष्ठ रंगकर्मी चन्द्र शेखर शर्मा के निर्देशन में प्रख्यात कथाकार स्वर्गीय राजेंदर सिंह बेदी की कहानी लाजवंती पर आधारित नाटक लाजो का मंचन किया. यह प्रस्तुति केवल एक नाटक नहीं, बल्कि उस त्रासदी का जीवंत दस्तावेज थी, जिसे बंटवारे ने इंसानियत की रूह पर लिखा था .

बंटवारा: जमीन का नहीं, रिश्तों का दर्द

पारंपरिक इतिहास ने बंटवारे को सीमा रेखा के दोनों ओर बहने वाले खून और विस्थापन के आंकड़ों के रूप में दर्ज किया है. लेकिन नाटक लाजो इससे परे जाकर उस गहरे मानवीय क्षरण को उकेरता है, जहाँ विभाजन सिर्फ देश का नहीं, बल्कि आत्मा का भी होता है. यह वही दर्द है जिसे रंगमंच ने हमेशा संजोया है. ऑक्सफोर्ड अकादमिक के एक अध्ययन के अनुसार, यह वह दौर था जब प्रगतिशील लेखक संघ और इप्टा जैसी संस्थाओं ने सांप्रदायिकता के खिलाफ हथियार के तौर पर रंगमंच का इस्तेमाल किया . नाटक में तीन पात्रों के दायरे में रहते हुए भी चन्द्र शेखर शर्मा ने मूल कथा की गरिमा को बनाए रखते हुए एक ऐसा त्रिकोणात्मक संघर्ष गढ़ा है, जो हिंदुस्तान-पाकिस्तान की सीमा से परे नारी-पुरुष संबंधों की बुनियादी दरार को भी उजागर करता है.

जब हिंसा की भेंट चढ़ जाती है इज्जत

नाटक की नायिका लाजो (अभिनेत्री सरिता राणा) को दंगाइयों ने बलपूर्वक पाकिस्तान उठा लिया. वह इसी उम्मीद में जिंदा रहने का प्रयास करती है कि एक दिन वह अपने पति के पास वापस लौटेगी और उसे वही प्यार, वही अपनापन मिलेगा. यह वही सवाल है जिसे जीशा मेनन ने अपने शोध ‘रिहर्सिंग द पार्टिशन: जेंडर्ड वायलेंस’ में उठाया है कि किस तरह राजनीतिक हिंसा के जरिए महिला शरीर को एक राजनीतिक वस्तु में बदल दिया जाता है और फिर उसके अस्तित्व को परिवार और समाज की शर्तों पर फिर से परिभाषित किया जाता है . लाजो जब वापस लौटती है, तो उसे घर में तो जगह मिलती है, लेकिन दिल में जगह नहीं मिल पाती. उसका पति जमाल (रविन्द्र सिंह) वहीं है, पर रिश्ता वह नहीं रहा.

‘उसे दिल में जगह दो’

राजेंदर सिंह बेदी ने लाजवंती के जरिए एक ऐसे सामाजिक पाखंड को उजागर किया था, जहाँ पति पहले अपनी पत्नी को मारता-पीटता है और बंटवारे के बाद जब वह अग्निपरीक्षा देकर लौटती है तो उसे छुआ तक नहीं जाता . नाटक में यह दृश्य अत्यंत मार्मिक बन पड़ा जब नायक यह प्रण करता है कि वह लाजो को दिल में जगह देगा, लेकिन जब वह लौटती है, तो उसका स्पर्श भारी हो जाता है. बेदी की कहानी में यह संवेदना इस कदर गहरी है कि लोग इसे भूलकर ‘इज्जत’ के नाम पर पत्थर दिल बने रहते हैं. मूल कहानी के एक संस्करण के अनुसार, नारायण बाबा के मंदिर के पंडे और रूढ़िवादी लोग इस विचार के विरोधी थे कि इन महिलाओं को ‘दिल में जगह’ दी जाए .

कलाकारों ने भरी जान

लाजो की भूमिका में सरिता राणा ने स्त्री पीड़ा की मुखर आवाज बनकर दर्शकों को विचलित कर दिया. वहीं जमाल बने रविन्द्र सिंह ने अपने दमदार और सधे अभिनय से पात्र की जटिलता को बखूबी निभाया. चन्द्र शेखर शर्मा ने निर्देशक होने के साथ-साथ एक कलाकार की भूमिका में भी अपनी छाप छोड़ी. मुख्य अतिथि प्रोफेसर पूनम वर्मा (प्रिंसिपल, शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज) ने इस प्रस्तुति की भूरि-भूरि प्रशंसा की. उन्होंने कहा, “हर युवा के लिए इस नाटक को देखना आवश्यक है, क्योंकि इतिहास सिर्फ अतीत नहीं, बल्कि भविष्य की राह तय करने वाला प्रकाश है. इस नाटक के अनेकों मंचन होने चाहिए.”

तकनीक ने बांधा माहौल

नाटक के प्रभाव को और गहरा करने में मंच के पीछे की टीम का भी अहम योगदान रहा. जतिन शौरी की प्रकाश परिकल्पना ने लाजो के मानसिक संघर्ष को छाया और उजाले की जुबां दी, वहीं निखिल झा के संगीत ने बंटवारे की कारुणिक पीड़ा को स्वर दिए. मेकअप में मनोज व परिधानों में ममता रानी ने पात्रों को प्रामाणिक रूप दिया. मंच व्यवस्था में उदयन गुप्ता, आशीष शर्मा, राकेश शर्मा, पुष्कर सागर, अमित शाह और रघुवीर पाल ने सक्रिय सहयोग दिया. कार्यक्रम की सूत्रधार प्रसिद्ध आरजे माला नेगी ने पूरे आयोजन को संजोए रखा.

नाटक की समाप्ति के बाद दर्शकों के साथ हुई बातचीत का दौर भी काफी सराहा गया, जहां लोगों ने आज के सामाजिक परिप्रेक्ष्य में बिखरते रिश्तों पर अपनी राय साझा की. मास्क प्लेयर्स आर्ट ग्रुप की अगली प्रस्तुति 7 मार्च, 2026 को आयोजित की जाएगी.

ये भी पढ़ें- अमरावती बनेगा देश का ‘सिलिकॉन वैली’; 19 फरवरी को रखी जाएगी भारत की पहली AI यूनिवर्सिटी की नींव

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital