Meghalaya violence Effect In Assam Election: मार्च 2026 की शुरुआत में मेघालय के वेस्ट गारो हिल्स जिले के चिबिनांग फुलबारी और टुरा जैसे पहाड़ी इलाकों में हिंसा भड़क उठी. इस हिंसा की जड़ एक नोटिफिकेशन था, जिसमें 10 अप्रैल को होने वाले गारो हिल्स ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (GHADC) चुनाव लड़ने से गैर-जनजातीय लोगों को रोका गया था. गारो जनजाति के संगठनों ने इस चुनाव में गैर जनजातीय लोगों, जिसमें मुख्य रूप से बंगाली भाषी मुस्लिम थे का जबरदस्त विरोध किया था. उनका कहना था कि यह चुनाव सिर्फ जनजाति के लोगों के लिए है, जबकि बंगाली मुस्लिमों ने इसे अपना अधिकार बताते हुए विरोध दर्ज कराया था.
गारो और मुस्लिमों के बीच हुई यह झड़प देखते ही देखते भयंकर दंगे का रूप ले लिया. जिसमें कई घरों और दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया. दो समुदायों के बीच हो रहे इस भयंकर संघर्ष को रोकने के लिए पुलिस ने फायरिंग की. जिसमें दो लोग मारे गए. रिपोर्ट्स के मुताबिक मारे गए दोनों लोग बंगाली मुस्लिम समुदाय के थे.
सरकार ने एहतियातन इलाके में कर्फ्यू लगाकर मोबाइल इंटरनेट को बंद कर दिया. इलाके में हालात सामान्य करने के लिए सेना को भी तैनात कर दिया गया है. फिलहाल GHADC चुनाव को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है.
असम चुनाव में ध्रुवीकरण की आशंका
मेघालय में दो समुदायों के बीच हुए इस संघर्ष ने पड़ोसी राज्य असम में राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है. राजनीतिक विश्लेषक इस हिंसा का नॉर्थ ईस्ट के प्रमुख राज्य असम में राजनीतिक ध्रुवीकरण की आशंका जता रहे हैं. विश्लेषकों के अनुसार इस साल असम में चुनाव होने हैं. जिसमें इस मामले पर वोटों के बंटवारे की कोशिश की जाएगी. आखिर पड़ोसी राज्य में हुए इस हिंसा का असर असम में कैसे दिखेगा और इसका फायदा किसे होगा?
हिंसा मेघालय में तो प्रभाव असम पर कैसे?
यह समझने के लिए हमें पहले मेघालय और असम के भूगोल को समझना होगा. पूर्वोत्तर के असम और मेघायल राज्य एक-दूसरे के साथ भौगोलिक सीमा साझा करते हैं. वेस्ट गारो हिल्स असम के दक्षिणी सलमारा-मानकाचर, गोलपारा, धुबरी और कामरूप जैसे सीमावर्ती जिले लगा हुआ है.
मेघालय में हुई हिंसा की वजह से इन जिलों में भी हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया गया है. सीमा पर यात्रियों की सख्त निगरानी रखी गई है. इसके साथ ही असम सरकार ने तनाव को देखते हुए मॉनिटरिंग बढ़ा दी है.
बीजेपी का क्या है रुख?
मेघायल में हुई इस हिंसा का रविशंकर प्रसाद समेत कई बीजेपी नेताओं ने इसे बांग्लादेशी घुसपैठियों का नतीजा बताया है. बीजेपी ने जनजातीय अधिकारों का समर्थन किया है और GHADC को केवल जनजातीय रखने की मांग की है. भाजपा की तरफ से दावा किया है कि बांग्लादेशी घुसपैठिये शादी या फर्जी ST सर्टिफिकेट के जरिये चुनाव लड़ने की कोशिश कर रहे थे.
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असम चुनाव में पड़ेगा सीधा प्रभाव
साल 2026 के असम चुनाव में इस हिंसा का सीधा असर दिखने की आशंका है. असम में बीजेपी जाति, माटी और भेटी (असमिया पहचान, जमीन और अस्तित्व) के मुद्दे पर चुनाव लड़ती है. जिसमें बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठ के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाता है. असम के सीमावर्ती इलाकों में यह नारा वोट को एकतरफा करने के लिए काफी है.
मेघालय हिंसा का असर असम के निचले इलाकों और बॉर्डर क्षेत्रों में भी दिख सकता है. यहां पर रहने वाले हिंदू बंगाली और असमिया वोटरों में डर पैदा होगा कि मेघायल जैसा हाल असम में भी देखने को मिल सकता है. इसके अलावा कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी उभरेगा.
असम में बीजेपी के लिए हिंदू वोट बैंक कितना महत्वपूर्ण?
सूबे के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा घुसपैठ के खिलाफ अपने अभियानों के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने असम में असमिया पहचान को प्रमुखता से उठाया है. जिसका उन्हें हालिया सर्वे में फायदा भी दिख रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2026 के पहले हुए सर्वे में असम में बीजेपी गठबंधन को 126 में से 98 सीटें मिलती दिख रही हैं.
असम में बीजेपी का मुख्य आधार हिंदू वोटबैंक है. जिसमें असमिया और बंगाली हिंदू सामिल हैं. बीजेपी हिंदू वोटबैंक के सहारे सूबे की लगभग 34 प्रतिशत मुस्लिम वोट को मात देने की कोशिश में है. बीजेपी की इस कोशिश को मेघालय हिंसा बूस्ट देगी.
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने असम में घुसपैठ के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है. शाह के मुताबिक कांग्रेस ने घुसपैठ को वैध और सामान्य बना दिया है. वहीं बीजेपी वादा कर रही है कि जितने भी असम में मुस्लिम बाहुल्य जिले हैं जैसे बारापेट, घुबरी और गोलपारा, काजीरंगा आदि जिलों से घुसपैठियों को बाहर किया जाएगा. हाल ही में असम सरकार ने 1.51 लाख बीघे जमीन को छुड़ाई है. हालांकि अभी चुनाव होने में समय है लेकिन मेघालय हिंसा का असम में प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता. फिलहाल मौजूदा ट्रेंड बीजेपी के पक्ष में दिखाई दे रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
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