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मोदी कैबिनेट का मेगा प्लान: सेमीकंडक्टर क्रांति के लिए ₹1.27 लाख करोड़ की ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना को मंजूरी

SEMICON 2.0 LAUNCH: पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने ₹1,27,500 करोड़ के भारी बजट के साथ ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना को मंजूरी दे दी है, जिससे भारत चिप हब बनेगा.

PM Modi
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश को इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी विनिर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. बुधवार को हुई कैबिनेट की अहम बैठक में ‘सेमीकॉन 1.0’ की शानदार सफलता के बाद घरेलू सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना को मंजूरी दे दी गई है. इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए सरकार ने 1,27,500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट निर्धारित किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में एक प्रमुख और विश्वसनीय केंद्र के रूप में स्थापित करना है.

12 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी, 3 में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू

सरकारी बयान के अनुसार, भारत में अब तक 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कुल निवेश प्रस्तावित है. इन परियोजनाओं में एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक इंटीग्रेटेड गैलियम नाइट्राइड माइक्रो एलईडी डिस्प्ले फैब और नौ पैकेजिंग यूनिट्स शामिल हैं. ये इकाइयां ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार और एयरोस्पेस जैसे अहम क्षेत्रों की चिप जरूरतों को पूरा करेंगी. राहत की बात यह है कि मंजूर की गई 12 परियोजनाओं में से माइक्रोन (Micron), केयन्स (Kaynes) और सीजी सेमी (CG Semi) ने अपना व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू कर दिया है, जबकि एक अन्य यूनिट के वर्ष 2026 में उत्पादन शुरू करने की उम्मीद है.

स्टार्टअप्स और MSME को बड़ा बूस्ट

सरकार ने इस क्षेत्र में छोटे उद्योगों और युवाओं को बढ़ावा देने के लिए 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता की मंजूरी दी है. इसके साथ ही, 105 स्टार्टअप और एमएसएमई (MSME) को उद्योग में इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स तक मुफ्त पहुंच उपलब्ध कराई गई है.

सेमीकॉन 2.0 के 6 प्रमुख स्तंभ (Six Pillars of Strategy)

सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत की यह नई सेमीकंडक्टर रणनीति छह मुख्य पिलर्स पर आधारित होगी:

चिप डिजाइन (Chip Design): स्वदेशी चिप और सिस्टम डिजाइन के साथ-साथ बौद्धिक संपदा (IP) विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

मशीनें और कच्चा माल: सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री, रसायनों, गैसों और मशीनों के निर्माण तथा आरएंडडी (R&D) में लगी कंपनियों को बड़ा वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा.

नई फैब इकाइयों की स्थापना: देश की पहली सेमीकंडक्टर फैब वर्ष 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक कंपनियों का भरोसा भारत पर और मजबूत होगा.

एटीएमपी और ओसैट (ATMP & OSAT) का विस्तार: अत्याधुनिक पैकेजिंग तकनीकों को भारत लाने और इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा, जिससे भारत एक वैकल्पिक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बने.

अनुसंधान एवं विकास (R&D): भारत की यात्रा 28 से 110 नैनोमीटर तकनीक से शुरू हुई थी, लेकिन अब दुनिया के अग्रणी अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से इससे भी अधिक उन्नत तकनीकों और नए नोड्स के विकास पर काम किया जाएगा.

कुशल मानव संसाधन (Talent Pool): वर्तमान में देश के 315 विश्वविद्यालयों में चिप डिजाइन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जहां लगभग 68,000 छात्र प्रशिक्षित हो चुके हैं. अब इस कार्यक्रम को और व्यापक बनाया जाएगा.

 



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