मोदी सरकार ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान कर्नाटक में अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के छात्रों की उच्च शिक्षा के लिए ‘पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना’ के तहत 1,178.20 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की है.
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि यह राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए भेजी गई है.
तीन वर्षों में जारी हुआ वित्तीय आंकड़ा
संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में एससी वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति के रूप में जारी केंद्रीय अंश वर्षवार इस प्रकार रहा:
2023-24: ₹421.08 करोड़
2024-25: ₹422.90 करोड़
2025-26: ₹334.22 करोड़
कुल योग: ₹1,178.20 करोड़
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से इस केंद्र प्रायोजित योजना को संचालित करता है. वर्ष 2021-22 से इस योजना को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली के तहत लागू किया जा रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है.
डीबीटी और नेशनल स्कॉलरशिप
सरकार ने स्पष्ट किया कि छात्रवृत्ति का केंद्रीय हिस्सा जारी होना इस बात पर निर्भर करता है कि राज्य सरकारें नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) पर भुगतान का अंतिम रूप से सत्यापित डेटा साझा करें. यह योजना पूरे देश में मान्यता प्राप्त संस्थानों के सभी पात्र छात्रों के लिए मांग-आधारित (Demand-Driven) रूप से खुली है.
इसके अलावा, अनुसूचित जातियों के लिए विकास कार्य योजना (DAPSC) के तहत नीति आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार संबंधित मंत्रालय एससी समाज के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए फंड आवंटित करते हैं. केंद्रीय बजट के व्यय विवरण (स्टेटमेंट 10A) में इन आवंटित फंडों का पूरा ब्योरा प्रस्तुत किया जाता है.
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