Montenegro National Day Cultural Event: यूरोपीय देश मोंटेनेग्रो के ‘नेशनल डे’ (13 जुलाई) से पहले भारत में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया. यह सांस्कृतिक कार्यक्रम राजधानी दिल्ली स्थित अशोक होटल में शाम 7:00 बजे से 9:30 बजे तक चला, जिसमें कई देशों के राजदूतों और उनके प्रतिनिधियों ने शिरकत की.
कार्यक्रम के दौरान मोंटेनेग्रो के राष्ट्रपति याकोव मिलाटोविक, प्रधानमंत्री मिलोज्को स्पाजिक और विदेश मंत्री एर्विन इब्राहिमोविच ने विशेष रूप से संबोधन दिया. इस अवसर पर भारत-मोंटेनेग्रो के बीच सांस्कृतिक और राजनयिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया.
13 जुलाई को मनता है मोंटेनेग्रो का राष्ट्रीय दिवस
मोंटेनेग्रो के राष्ट्रीय दिवस (13 जुलाई) से पूर्व आज के कार्यक्रम की एक खास बात रही- भारत में मोंटेनेग्रो की मानद काउंसलेट जनरल डॉ. जेनिस दरबारी को उनके 17 वर्षों के राजनयिक सेवा के लिए सम्मानित करना. उन्हें विश्व स्तर पर शांति और प्रेम की वकालत करने वाली अग्रणी राजनयिक के रूप में मान्यता दी गई.

काउंसलेट जनरल डॉ. जेनिस दरबारी का सम्मान
इस दौरान डॉ. दरबारी को एक स्मृति चिन्ह भेंट किया गया, जिसमें उनके परिवार की राजनयिक विरासत को भी सराहा गया. उनके दादा जगदीश्वर निगम, जो 1923 बैच के आईसीएस अधिकारी थे, ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

डॉ. जेनिस दरबारी का करियर असाधारण रहा है. 1994 में मैसेडोनिया में विशेष दूत के रूप में नियुक्ति के बाद उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया. उनके पिता शत्रुघ्न स्वरूप दरबारी संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि रह चुके हैं. डॉ. दरबारी ने असम समझौते और राष्ट्रीय बांस नीति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कार्य किया. इसके अलावा, वे ओडिसी नृत्य कलाकार, सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका भी हैं. उनकी पुस्तकें, जैसे “इंदिरा गांधी: 1028 डेज़”, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हैं.



डॉ. जेनिस का “द एडमिनिस्ट्रेटर” फिल्म प्रोजेक्ट
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि डॉ. जेनिस दरबारी और उनकी बहन डॉ. राज दरबारी “द एडमिनिस्ट्रेटर” नामक फिल्म बना रही हैं, जो उनके दादा जगदीश्वर निगम के क्रांतिकारी कार्यों पर आधारित है. यह फिल्म ब्रिटिश साम्राज्यवाद और लोकतांत्रिक जागृति के बीच संघर्ष को दर्शाएगी.

एसजेआर फिल्म प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित इस फिल्म की पुस्तक “आज़ादी का अमृत महोत्सव” पोर्टल पर प्रकाशित हुई है. यह परियोजना भारत-ब्रिटिश संबंधों और शांति पहलों को रेखांकित करती है.
विदेश मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव की मौजूदगी
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और G20 शेरपा पूजा कपूर उपस्थित रहीं. पूजा कपूर हाल ही में डेनमार्क में भारत की राजदूत रहीं और इससे पहले बुल्गारिया व उत्तर मैसेडोनिया में भी सेवाएं दीं.
बलिया, उत्तर प्रदेश की रहने वाली पूजा ने अपने संबोधन में भारत-मोंटेनेग्रो के बीच बढ़ते सहयोग पर प्रकाश डाला. उनके नेतृत्व में इस कार्यक्रम ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.


दो देशों के रसोइयों के बीच रेसिपी की पाककला
कार्यक्रम में मोंटेनेग्रो और भारत के रसोइयों के बीच आज एक अनोखा पाककला सहयोग देखने को मिला. आईटीडीसी के प्रसिद्ध रसोइयों के साथ मोंटेनेग्रो के शेफ्स ने दोनों देशों के पारंपरिक व्यंजनों का एक शानदार भोज प्रस्तुत किया. इस भोज ने सांस्कृतिक एकता को दर्शाया और दोनों देशों के लोगों के बीच मधुर संबंधों को मजबूत करने में योगदान दिया. कार्यक्रम में मोंटेनेग्रो के प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन स्थलों, जैसे दुरमिटोर पर्वत और कोटर की खाड़ी, की झलक भी दिखाई गई.
भारत-मोंटेनेग्रो में खेल-सांस्कृतिक आदान-प्रदान
हाल के वर्षों में भारत और मोंटेनेग्रो के बीच खेल और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में वृद्धि हुई है. भारतीय टीमें क्रिकेट, फुटबॉल, मुक्केबाजी और राफ्टिंग के लिए मोंटेनेग्रो का दौरा कर चुकी हैं. युवा ट्रेकिंग एक्सचेंज कार्यक्रम की शुरुआत श्री शिवांग ध्यानी ने की, जो दोनों देशों के युवाओं के बीच संबंधों को मजबूत कर रहा है. इस सहयोग ने सांस्कृतिक समृद्धि को बढ़ावा दिया है.

“भूमध्य सागर का मोती” कहा जाता है मोंटेनेग्रो
मोंटेनेग्रो, जिसे “भूमध्य सागर का मोती” कहा जाता है, अपने प्राकृतिक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है. दुरमिटोर पर्वत, बुडवा के समुद्र तट और यूनेस्को सूचीबद्ध कोटर की खाड़ी इसके प्रमुख आकर्षण हैं. इस समारोह ने मोंटेनेग्रो की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन की संभावनाओं को उजागर किया, जिससे भारत में इसके प्रति रुचि बढ़ी है.


दिल्ली में आज हुआ समारोह न केवल मोंटेनेग्रो के राष्ट्रीय दिवस का उत्सव था, बल्कि भारत-मोंटेनेग्रो के बीच साझेदारी को मजबूत करने का अवसर भी बना. डॉ. जेनिस दरबारी की राजनयिक उपलब्धियां और पूजा कपूर का नेतृत्व इस आयोजन को यादगार बनाया. सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शांति की भावना ने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दी है.
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