मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को लेकर जमीन विवाद का उठा जिन्न अब दिल्ली के सियासी गलियारों में पहुंच गया है. मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने सिर्फ 1 रुपये के टोकन मनी पर 500 करोड़ की जमीन अपने एक सलाहकार के ट्रस्ट को सौंप दिया. एमपी कांग्रेस अध्यक्ष के इस खुलासे ने मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है.
कांग्रेस का आरोप
दरअसल, ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में भूचाल आया हुआ है. रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सीएम पद संभालने के बाद मोहन यादव, उनके परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन के आसपास लगभग 168 एकड़ (137 प्लॉट) जमीनें खरीदी हैं.
अब इसी कड़ी में जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये आरोप लगाया है कि उज्जैन में करीब 500 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन मात्र 1 रुपये में एक निजी ट्रस्ट को अलॉट कर दी गई. पटवारी ने दावा किया कि ये ट्रस्टी कोई और नहीं बल्कि खुद एमपी के मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार रामजी है.
कांग्रेस के सवाल
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने तीखे सवाल दागे कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार द्वारा ताबड़तोड़ खरीदी गई सैकड़ों एकड़ जमीन के लिए आखिर पैसा कहाँ से आया और क्या सरकार इन जमीनों का पूरा ब्योरा और विकास परियोजनाओं की टाइमलाइन जनता के सामने रखेगी?
बीजेपी द्वारा इन आरोपों पर जातिगत राजनीति का कार्ड खेलने पर पलटवार करते हुए पटवारी ने कहा कि सवाल जमीन पर पूछा गया था तो जवाब जाति पर क्यों दिया गया, क्या यही इनकी सोच है?
उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में चंदा चोरी और महाकाल की नगरी में जमीन की लूट ही अब बीजेपी का नया मॉडल बन चुका है, और अगर सरकार वाकई पारदर्शी है तो मुख्यमंत्री को 2023 के बाद अपने परिवार द्वारा खरीदी गई जमीनों पर तुरंत श्वेत पत्र जारी करना चाहिए और इस पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच करानी चाहिए।
-भारत एक्सप्रेस
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