Nadi Pariksha Workshop: रोग निदान एवं विकृति विज्ञान (आरएनवीवी) विभाग, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली की ओर से बुधवार को संस्थान परिसर में नाड़ी परीक्षा विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया. इस कार्यशाला में दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुल 19 आयुर्वेद महाविद्यालयों से आए शिक्षक और शोधार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.
कार्यशाला का उद्घाटन सत्र एआईआईए के निदेशक प्रो. (वैद्य) पी. के. प्रजापति की अध्यक्षता में संपन्न हुआ. इस मौके पर संस्थान के डीन (पीजी) डॉ. आर. के. यादव, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजा राम महतो और आरएनवीवी विभागाध्यक्ष डॉ. विवेक अग्रवाल विशेष रूप से मौजूद रहे. सभी अतिथियों ने कार्यशाला की उपयोगिता और आयुर्वेदिक निदान पद्धतियों के महत्व पर अपने विचार रखे.
आयुर्वेद में कौशल बेहद जरूरी
अपने उद्घाटन संबोधन में प्रो. (वैद्य) पी. के. प्रजापति ने कहा कि आयुर्वेद में सटीक और प्रभावी उपचार के लिए व्यावहारिक तथा प्रमाण-आधारित निदान कौशल बेहद जरूरी है. उन्होंने बताया कि नाड़ी परीक्षा केवल एक पारंपरिक विधि ही नहीं, बल्कि आज के समय में भी यह आधुनिक क्लीनिकल प्रैक्टिस में बेहद प्रासंगिक है. इसे वैज्ञानिक दृष्टि से और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है.

वैज्ञानिक प्रमाणीकरण पर रहा जोर
प्रो. (वैद्य) पी. के. प्रजापति ने नाड़ी परीक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वरिष्ठ वैद्यों वैद्य बसंत लाड़, प्रो. आर. के. सिंह और प्रो. एम. एस. बागेल का स्मरण भी किया. साथ ही, नाड़ी तरंगिणी ऐप जैसी नई तकनीकों को अपनाकर नाड़ी परीक्षा के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण पर जोर दिया.
कार्यशाला में प्रसिद्ध नाड़ी विशेषज्ञ डॉ. सुधा शर्मा और डॉ. राजीव शर्मा ने अतिथि वक्ता के रूप में भाग लिया. दोनों विशेषज्ञों ने अपने लंबे चिकित्सकीय अनुभव साझा किए और नाड़ी परीक्षा की बारीकियों को सरल तरीके से समझाया. सत्रों के दौरान लाइव डेमोंस्ट्रेशन, हाथों-हाथ प्रशिक्षण और केस-आधारित चर्चाओं के जरिए प्रतिभागियों को नाड़ी परीक्षा की व्यावहारिक समझ दी गई.

नाड़ी परीक्षा को प्रभावी बनाना उद्वेश्य
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद के शिक्षक और शोधार्थियों को नाड़ी परीक्षा के प्रैक्टिकल पहलुओं से जोड़ना और इसे मुख्यधारा की चिकित्सा पद्धति में अधिक प्रभावी बनाना था. संवादात्मक सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपने सवाल पूछे और विशेषज्ञों से सीधे मार्गदर्शन प्राप्त किया. प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला को बेहद उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया.
यह आयोजन आयुर्वेदिक शिक्षा, शोध और प्रमाणिक निदान पद्धतियों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की दिशा में एआईआईए की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
-भारत एक्सप्रेस
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