नैमिषारण्य सीतापुर में निकलती ऐतिहासिक 84 कोसी परिक्रमा
सीतापुर- यूपी के सीतापुर में स्थित नैमिषारण्य की 84 कोसी परिक्रमा आज से प्रारंभ हो गई है. डंका की धाप और बटुकों के शंख नाद होते ही परिक्रमा अपने प्रथम पड़ाव कोरोना द्वारकाधीश के दर्शन के लिए मध्य रात्रि से चल पड़ी. इस परिक्रमा में हजारों साधु संत महामंडलेश्वर श्रद्धालु रथों में सवार होकर पैदल चलकर परिक्रमा पथ पर पड़ाव की ओर धर्म ध्वजा थामें बढ़ते नजर आए. सर्वप्रथम श्रद्धालुओं ने चक्र तीर्थ में स्नान कर शक्तिपीठ ललिता देवी मंदिर में माथा टेककर गंतव्य की ओर प्रस्थान किया. प्रशासन ने परिक्रमा मार्ग के गेट पर साधु संतों का पूजन किया व माल्यार्पण भी किया. नगर पालिका की तरफ से संतों व श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की गई. परिक्रमा में व्यास पीठ के पीठाधीश्वर अनिल शास्त्री अपने तीन दिव्य रथों के साथ परिक्रमा कर रहे हैं इन रथों में भगवान वेदव्यास भगवान राम दरबार और महर्षि दाधीच की प्रतिमाएं परिक्रमा में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.
श्रद्धालुओं के लिए की गई समुचित व्यवस्थाएं
आपको बता दें कि नैमिषारण्य की 84 कोसी परिक्रमा सतयुग से निरंतर फाल्गुन मास की प्रतिपदा को होती चली आ रही है. इस परिक्रमा को सर्वप्रथम महर्षि दाधीच ने अपनी अस्थियां दान करने से पहले किया था. त्रेता युग में भगवान राम ने अपने परिवार के साथ नैमिष की 84 कोसी परिक्रमा की थी तब से इस परिक्रमा को रामा दल भी कहा जाता है. पुराणों के अनुसार जो मनुष्य नैमिष की 84 कोसीय परिक्रमा करता है. उसे 84 लाख योनियों से मुक्ति मिल जाती है.
शासन प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्थाएं की गई है श्रद्धालुओं की सुरक्षा में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. वही परिक्रमा के दौरान डॉक्टरों की टीम भी साथ चल रही है.
जीतेन्द्र सैनी की रिपोर्ट सीतापुर
-भारत एक्सप्रेस
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