National Space Day 2025: भारत अपने दूसरे राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस (National Space Day 2025) का उत्सव मना रहा है, जो अब एक प्रमुख वार्षिक कार्यक्रम बन गया है. यह दिन उस ऐतिहासिक क्षण को याद करने के लिए मनाया जाता है जब भारत ने चंद्रमा पर सफलतापूर्वक कदम रखा.
चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक लैंडिंग
23 अगस्त, 2023 को ISRO के चंद्रयान-3 मिशन ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडिंग की. इस उपलब्धि के साथ भारत इस अज्ञात क्षेत्र तक पहुंचने वाला पहला देश बन गया. बाद में उस स्थल का नाम शिव शक्ति प्वाइंट रखा गया. मिशन कंट्रोल में वैज्ञानिक और इंजीनियर खुशी से झूम उठे, और देशभर के नागरिकों ने इस ऐतिहासिक लैंडिंग को स्क्रीन पर देखा.
तकनीकी नवाचार और चुनौतियां
चंद्रयान-3 की सफलता कई वर्षों की तकनीकी नवाचार और चुनौतियों को पार करने का परिणाम थी, विशेषकर चंद्रयान-2 की आंशिक असफलता के बाद. ISRO के इंजीनियरों ने पिछले मिशन का गहन अध्ययन किया और 200 से अधिक डिजाइन सुधार लागू किए. मिशन की नई रणनीति “फेल्योर-आधारित डिज़ाइन” थी, जिससे लैंडर अप्रत्याशित परिस्थितियों को सहन कर सके.
सटीक और सफल लैंडिंग प्रक्रिया
लैंडिंग के दिन चंद्रयान-3 ने पावर्ड डिसेंट किया और अत्याधुनिक सेंसर, कैमरा और एल्गोरिदम की मदद से स्वायत्त रूप से नेविगेशन किया. प्रिसिजन थ्रस्टर्स ने दिशा समायोजित की और ऑनबोर्ड हेज़र्ड डिटेक्शन सिस्टम ने खतरनाक क्षेत्रों से बचाया. 1.7 किमी/सेकंड की प्रारंभिक गति से धीमा होकर लैंडर ने लंबवत लैंडिंग की, और इसके चार पैर अंतिम झटका अवशोषित कर गए. मिशन कमांड में जश्न का माहौल बन गया.
ISRO चंद्रयान-4 पर कर रहा है काम
ISRO चंद्रयान-4 पर काम कर रहा है, जो 2028 में लॉन्च होगा और चंद्रमा से नमूने लाएगा. यह मिशन दो-चरणीय लॉन्च रणनीति अपनाएगा. वहीं, चंद्रयान-5 मिशन जापानी अंतरिक्ष एजेंसी (JAXA) के साथ सहयोग में होगा, जिसमें भारतीय लैंडर और जापानी रोवर स्थायी छायादार क्षेत्रों का अन्वेषण करेंगे. इस तरह चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत की अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक में बढ़ती क्षमताओं की नींव रखी और भविष्य के मिशनों के लिए मार्ग प्रशस्त किया.
Also Follow Bharat Express on Instagram
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



