Bharat Express DD Free Dish

‘लाल आतंक’ का होगा अंत! नक्सलियों का सरेंडर तेज, दिखा अमित शाह की डेडलाइन का असर

Naxal surrender: बस्तर और दंतेवाड़ा में महिला नक्सलियों सहित कई माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण से नक्सलवाद के अंत के संकेत मिल रहे हैं.

Naxal surrender India 2026

सोमवार (31 मार्च) को गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने लोकसभा में कहा कि देश में अब नक्सलवाद खत्म होने की कगार पर है. बता दें कि 24 अगस्त 2024 को अमित शाह ने ऐलान किया कि देश से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा और उसकी आखिरी तारीख 31 मार्च 2026 तय की गई. इसे लेकर आज आखिरी दिन भी छत्तीसगढ़ में कई माओवादियों ने सरेंडर किया है.

लाखों की इनामी महिलाओं ने किया सरेंडर

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है, जहां दो महिला नक्सल कैडरों ने आत्मसमर्पण कर दिया. ये दोनों नक्सली संगठन की कंपनी नंबर 8 की सक्रिय सदस्य थीं और इन पर कुल 16 लाख रुपये का इनाम घोषित था. आत्मसमर्पण के दौरान सुरक्षा बलों ने उनके पास से 4 ऑटोमैटिक हथियार, जिनमें 2 AK-47 राइफल शामिल हैं, के साथ ही करीब 10 लाख रुपये नकद भी बरामद किए हैं. अधिकारियों के अनुसार, लगातार चलाए जा रहे अभियान और पुनर्वास नीति के प्रभाव से नक्सली अब मुख्यधारा में लौटने का फैसला कर रहे हैं. सुरक्षा बलों ने इसे क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों पर बड़ा प्रहार बताया है.

4 और महिलाओं ने किया सरेंडर

वहीं दूसरी दंतेवाड़ा जिले में भी नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है. यहां 5 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 4 महिला नक्सली भी शामिल हैं. सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों पर कुल 9 लाख रुपये का इनाम घोषित था. अधिकारियों के अनुसार, लगातार दबाव और सरकार की पुनर्वास नीतियों के चलते नक्सलियों में मुख्यधारा में लौटने की प्रवृत्ति बढ़ रही है.


ये भी पढ़ें: कल है ‘लाल आतंक’ का आखिरी दिन! अमित शाह की वो 3 तारीखें, जिन्होंने तोड़ दी नक्सलवाद की कमर


आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की निशानदेही पर सुरक्षा बलों ने 40 घातक हथियार बरामद किए हैं. इनमें एसएलआर, इंसास राइफल और बीजीएल लॉन्चर जैसे आधुनिक हथियार शामिल हैं. बताया जा रहा है कि “पूना मारगेम” पुनर्वास अभियान से प्रभावित होकर इन नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया. बस्तर पुलिस ने इसे नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है.

मंगलवार (31 मार्च) को लाल आतंक के अंत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है. इस दौरान लगातार हो रहे आत्मसमर्पण यह संकेत दे रहे हैं कि नक्सली अब हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की ओर बढ़ रहे हैं.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read