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नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने से तबाही, 700 से ज्यादा मौतें, 3 हजार लोग अब भी लापता

Nepal Tibet Flood: नेपाल और तिब्बत (चीन) के सीमावर्ती इलाकों में ग्लेशियर टूटने और अचानक आई बाढ़ से भारी तबाही मची है, 700 से ज्यादा शव बरामद किए जा चुके हैं. हजारों लोग अब भी लापता हैं, जबकि भारतीय नागरिकों और कैलाश मानसरोवर यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत एवं बचाव अभियान जारी है.

Himalayan Disaster Nepal Flood

नेपाल में आए फ्लस फ्लैड की तस्वीर (इमेज-IANS)

Nepal Tibet Flood: नेपाल और तिब्बत (चीन) के सीमावर्ती इलाकों में प्रकृति के भयावह प्रकोप ने विकराल रूप धारण कर लिया है. उच्च हिमाली क्षेत्र में हुए भीषण हिमस्खलन और ग्लेशियर टूटने के कारण आई अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने सैकड़ों गांवों और बस्तियों का नामो-निशान मिटा दिया है. नेपाल और चीन के आपदा प्रबंधन विभागों की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 700 से अधिक लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 3,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं. लापता लोगों में नेपाल के स्थानीय निवासियों के अलावा सैकड़ों विदेशी नागरिक, भारतीय तीर्थयात्री, और जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूर शामिल हैं.

ग्लेशियर खिसकने से 5.2 तीव्रता का आया कंपन, ताश के पत्तों की तरह ढह गए पुल

वैज्ञानिकों और उपग्रह तस्वीरों (Satellite Images) से मिली जानकारी के मुताबिक, यह त्रासदी किसी झील के फटने से नहीं, बल्कि एक विशालकाय ग्लेशियर के आधार-चट्टान सहित ढह जाने से हुई. मलबे और बर्फ के गिरने का प्रभाव इतना प्रचंड था कि स्थानीय सीस्मोग्राफ पर 5.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. ग्लेशियर ढहने के बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में मिट्टी और पत्थरों का ऐसा सैलाब आया कि तटवर्ती बस्तियां कुछ ही मिनटों में जलमग्न हो गईं. रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है. लगभग 19 पक्के मोटर पुल बह गए हैं और सड़कों का नामोनिशान मिट जाने से कई इलाकों का काठमांडू से संपर्क पूरी तरह कट गया है.

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर राहत अभियान तेज

इस आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री भी प्रभावित हुए हैं. भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि नेपाल और तिब्बत सीमा पर फंसे सैकड़ों भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है.

300 से अधिक भारतीय अभी भी संपर्क से बाहर: नेपाल आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों में फंसे और लापता भारतीयों की तलाश की जा रही है.

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी: भारतीय वायु सेना और नेपाली सेना के हेलीकॉप्टर दुर्गम पहाड़ी इलाकों में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं. त्रिशूली हाइडोपावर प्रोजेक्ट के टनल में फंसे कई भारतीय मजदूरों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि दर्जनों लोग अब भी सुरंगों में फंसे हुए हैं.
 राहत सामग्री की खेप: भारत सरकार ने नेपाल को भोजन, दवाइयां और राहत सामग्री की कई खेपें तुरंत रवाना की हैं.

यह भी पढ़ें: नेपाल के लिए ‘संजीवनी’ लेकर पहुंची इंडियन एयरफोर्स, चौथी खेप भेजकर क्या बोला विदेश मंत्रालय?

सुरंगों और मलबे में जिंदगी की तलाश, राहत कार्यों में मौसम बना विलेन

राहत और बचाव टीमें त्रिशूली 3A और 3B हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे 100 से अधिक कर्मचारियों को निकालने का प्रयास कर रही हैं. अस्पतालों के बाहर लापता लोगों के पोस्टर लगे हैं, और पहचान न हो सके शवों के डीएनए टेस्ट कराने की प्रक्रिया चल रही है. लगातार हो रही बारिश और धुंध के कारण हेलीकॉप्टरों की उड़ानों में बाधा आ रही है. वहीं, भोटेकोशी नदी के ऊपरी हिस्से में मलबा जमा होने से नई अस्थायी झीलें बन गई हैं, जिससे निचले इलाकों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. नेपाल और भारत के सीमावर्ती राज्य (विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार) हाई अलर्ट पर हैं.



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