सरकार ने 21 नवंबर से देशभर में श्रम कानूनों में बड़ा बदलाव किया है. पहले जहां 29 अलग-अलग लेबर लॉ लागू थे, अब उनकी जगह सिर्फ 4 नए कानून लागू किए गए हैं. इनका असर सीधे कर्मचारियों की सैलरी, पीएफ, पेंशन, ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य लाभों पर पड़ेगा. महिला वर्कर्स से लेकर गिग वर्कर्स तक सभी को एक ही कानून के दायरे में लाने की कोशिश की गई है.
ग्रेच्युटी का नियम बदला
सबसे बड़ा बदलाव ग्रेच्युटी को लेकर हुआ है. पहले किसी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल तक लगातार नौकरी करनी पड़ती थी. अब सरकार ने यह लिमिट घटाकर सिर्फ 1 साल कर दी है. यानी फिक्स्ड टर्म और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी सिर्फ एक साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी पाने के हकदार होंगे. यह प्राइवेट सेक्टर के लाखों कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है.
30 दिन में देना होगा पैसा
नए नियमों के मुताबिक कंपनियों को ग्रेच्युटी का पैसा 30 दिनों के भीतर देना होगा. अगर ऐसा नहीं किया गया तो कंपनी को 10% सालाना ब्याज का जुर्माना देना पड़ेगा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को वेतन और अन्य लाभों में स्थायी कर्मचारियों जैसा ही माना जाएगा. फर्क सिर्फ इतना है कि ग्रेच्युटी का समय घटाकर 1 साल कर दिया गया है.
शॉर्ट टर्म कर्मचारियों को फायदा
नए नियम से यह सुनिश्चित होगा कि शॉर्ट टर्म यानी कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड कर्मचारियों को सिर्फ इसलिए नुकसान न हो कि उनका रोल अस्थायी है. अगर उन्होंने एक साल में कम से कम 240 दिन काम किया है तो उन्हें ग्रेच्युटी मिलेगी. इससे उन कर्मचारियों को भी सुरक्षा मिलेगी जो प्रोजेक्ट बेस्ड काम करते हैं.
ग्रेच्युटी कैलकुलेशन में बदलाव
अब ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन भी बदल गया है. कुल सैलरी का कम से कम 50% हिस्सा “मजदूरी” माना जाएगा. इसका मतलब है कि ग्रेच्युटी की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाला आधार बढ़ जाएगा. नतीजा यह होगा कि कई कर्मचारियों को पहले से ज्यादा ग्रेच्युटी मिलेगी.
स्थायी कर्मचारियों के लिए अभी भी 5 साल
यहां ध्यान देने वाली बात है कि स्थायी कर्मचारियों के लिए नियम वही है. उन्हें ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल तक नौकरी करनी होगी. एक साल का नया नियम सिर्फ फिक्स्ड टर्म वाले कर्मचारियों पर लागू होगा. एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि यह गलतफहमी है कि अब हर कर्मचारी को एक साल बाद ग्रेच्युटी मिलेगी.
कंपनियों पर बढ़ा बोझ
कानूनी विशेषज्ञ देबजानी ऐच का कहना है कि यह बदलाव उन कंपनियों के लिए बड़ा झटका है जो लंबे समय से फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को बिना ग्रेच्युटी या सेवरेंस के नियुक्त करती रही हैं. अब उन्हें आनुपातिक ग्रेच्युटी देनी होगी. हालांकि उनका मानना है कि स्थायी कर्मचारियों की तुलना में यह बोझ कम रहेगा.
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कुल मिलाकर, नए लेबर कोड से फिक्स्ड टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है. अब उन्हें भी ग्रेच्युटी का हक मिलेगा और कंपनियों को समय पर भुगतान करना होगा. स्थायी कर्मचारियों के लिए नियम वही है, लेकिन शॉर्ट टर्म कर्मचारियों के लिए यह बदलाव उनके भविष्य को सुरक्षित करने वाला साबित होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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