कश्मीर घाटी में आतंकवाद और आतंकी फंडिंग से जुड़े मामलों की जांच को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़े स्तर पर छापेमारी अभियान चलाया. कई जिलों में एक साथ ये कार्रवाई की गई है. सूत्रों के मुताबिक, यह छापे आतंकवाद से जुड़े संगठनों और उनके नेटवर्क को कमजोर करने के मकसद से मारे जा रहे हैं.
एनआईए के महानिदेशक भी पहुंचे श्रीनगर
एनआईए के महानिदेशक सदानंद दाते भी खुद हालात का जायजा लेने के लिए श्रीनगर पहुंचे हैं. उनके साथ एनआईए की विशेष टीम भी घाटी में डेरा डाले हुए है. बताया जा रहा है कि छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत एजेंसी के हाथ लगे हैं. एनआईए की यह कार्रवाई अभी भी जारी है और किसी भी समय और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों का मिल रहा सहयोग
सूत्रों का कहना है कि एनआईए की यह रणनीति घाटी में आतंकी नेटवर्क की कमर तोड़ने के लिए बनाई गई है. स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों का भी इस ऑपरेशन में पूरा सहयोग मिल रहा है.
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एनआईए रेड्स का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) जम्मू-कश्मीर में मुख्य रूप से उन व्यक्तियों, संगठनों और नेटवर्क्स पर छापेमारी करती है जो आतंकवाद, आतंकी फंडिंग, हवाला लेनदेन, हथियारों की तस्करी और अलगाववादी गतिविधियों में शामिल होते हैं या उनके संपर्क में रहते हैं. इनमें शामिल होते हैं:
– आतंकी संगठनों के कथित सहयोगी
– फंडिंग नेटवर्क से जुड़े कारोबारी या हवाला ऑपरेटर
– अलगाववादी नेताओं और उनके सहयोगी
– संदिग्ध एनजीओ, ट्रस्ट और संगठन
– सोशल मीडिया पर आतंकवाद का प्रचार-प्रसार करने वाले
– आतंकी घटनाओं में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संलिप्त व्यक्ति
एनआईए छापेमारी से पहले इनपुट और पुख्ता खुफिया जानकारी जुटाती है. उसके बाद:
– स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के सहयोग से पूरी रणनीति तैयार की जाती है.
– छापेमारी से पहले इलाके की रेकी (Surveillance) की जाती है.
– फिर अचानक रेड की जाती है ताकि सबूत नष्ट न हो सकें.
– छापे के दौरान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज (मोबाइल, लैपटॉप, पेन ड्राइव), बैंक दस्तावेज, हवाला लेनदेन से जुड़े रजिस्टर, संदिग्ध साहित्य और अन्य सामग्री को जब्त किया जाता है.
– कई बार मौके पर ही पूछताछ भी की जाती है और जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारियां भी होती हैं.
– पूरी प्रक्रिया एनआईए के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में होती है और हर कदम का विधिवत रिकॉर्ड बनाया जाता है ताकि बाद में कोर्ट में पेश किया जा सके.
– आतंकवाद की फंडिंग के नेटवर्क को तोड़ना.
– आतंकियों को आर्थिक, लॉजिस्टिक और वैचारिक समर्थन देने वालों की पहचान करना और उन पर कानूनी कार्रवाई करना.
– आतंकियों के सुरक्षित पनाहगाहों और संपर्क सूत्रों को खत्म करना.
– जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों और उनके सहयोगियों को कमजोर करना.
– घाटी में कानून व्यवस्था बनाए रखने और आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए ठोस सबूत इकट्ठा करना.
– अलगाववादी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को समर्थन देने वाली ताकतों को बेनकाब करना.
एनआईए की इस तरह की छापेमारी से आतंकवाद के आर्थिक स्रोत कमजोर पड़ते हैं और आतंकी संगठनों को ऑपरेट करने में मुश्किलें आती हैं. इसके अलावा आतंकवादियों और उनके समर्थकों के मनोबल पर भी असर पड़ता है.
-भारत एक्सप्रेस
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