Palwal district hospital
Palwal Hospital: हरियाणा के पलवल जिले से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है. जिला नागरिक अस्पताल में एक गर्भवती महिला की सिजेरियन डिलीवरी के दौरान अचानक बिजली चली गई. इससे ऑपरेशन थिएटर में अंधेरा छा गया और स्थिति ऐसी बन गई कि डॉक्टरों को मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन पूरा करना पड़ा. घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया है और स्वास्थ्य विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी है.
ऑपरेशन के बीच चली गई बिजली
जानकारी के अनुसार, गुरुवार रात करीब 10 बजे एक गर्भवती महिला को सिजेरियन डिलीवरी के लिए ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया था. सर्जरी शुरू होते ही अचानक बिजली चली गई. सामान्य परिस्थितियों में ऐसे समय अस्पताल का इमरजेंसी इनवर्टर तुरंत काम करना चाहिए था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण वह भी चालू नहीं हो सका. कुछ मिनटों तक ऑपरेशन थिएटर पूरी तरह अंधेरे में रहा.
मरीज और गर्भस्थ शिशु की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों के सामने ऑपरेशन रोकना संभव नहीं था. ऐसे में मेडिकल टीम ने बिना समय गंवाए मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर सर्जरी जारी रखी. करीब तीन मिनट बाद जनरेटर से बिजली बहाल हुई, जिसके बाद ऑपरेशन सामान्य रोशनी में पूरा किया गया. अस्पताल प्रशासन के मुताबिक पूरी सर्जरी लगभग 15 मिनट में सफलतापूर्वक पूरी हुई.
मां और नवजात दोनों सुरक्षित
अस्पताल की ओर से बताया गया कि ऑपरेशन के बाद महिला और नवजात को स्पेशल केयर वार्ड में निगरानी के लिए रखा गया. दोनों की हालत सामान्य रहने पर शनिवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. हालांकि घटना ने अस्पताल की आपातकालीन तैयारियों और बिजली बैकअप व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं.
तकनीकी गड़बड़ी
प्राथमिक जांच में पता चला है कि ऑपरेशन थिएटर के इनवर्टर की बैटरी से जुड़े तार पर कार्बन जमा हो गया था, जिसके कारण कनेक्शन टूट गया. इसी वजह से बिजली जाने के बाद इनवर्टर बैकअप नहीं दे सका. बताया जा रहा है कि इस तकनीकी खराबी पर पहले किसी कर्मचारी का ध्यान नहीं गया था.त
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक बिजली कटने के बाद जनरेटर को ऑटो मोड में शुरू होकर सप्लाई देने में लगभग तीन मिनट का समय लगा. इसी दौरान डॉक्टरों को मोबाइल की रोशनी का सहारा लेना पड़ा. बाद में बिजली कर्मचारियों ने इनवर्टर का कनेक्शन ठीक कर दिया.
स्वास्थ्य विभाग ने बैठाई जांच
घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया. मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. सतेंद्र वशिष्ठ ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाएगा कि ऑपरेशन थिएटर में बिजली क्यों गुल हुई और बैकअप सिस्टम समय पर क्यों काम नहीं कर पाया. जांच में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.
इस मामले की जांच के लिए तीन डॉक्टरों और एक नर्सिंग प्रतिनिधि की कमेटी बनाई गई है. समिति ऑपरेशन से जुड़े डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों, बिजली कर्मचारियों और अन्य संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज करेगी ताकि पूरी घटना की वास्तविक वजह सामने आ सके.
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वीडियो वायरल होने पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नया विवाद भी खड़ा हो गया. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ऑपरेशन थिएटर के अंदर वीडियो रिकॉर्ड करना मरीज की गोपनीयता का उल्लंघन है और यह अस्पताल के नियमों के खिलाफ है.
सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान मौजूद एनेस्थीसिया विभाग के एक डॉक्टर ने वीडियो रिकॉर्ड कर उसे अस्पताल के एक व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किया था. वहीं से यह वीडियो सोशल मीडिया तक पहुंच गया. अब जांच कमेटी इस पहलू की भी पड़ताल करेगी कि वीडियो कैसे रिकॉर्ड हुआ और बाहर कैसे पहुंचा.
अस्पताल की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में बिजली बैकअप और आपातकालीन तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है. सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर जनरेटर चालू होने में कुछ मिनट और लग जाते या मरीज की स्थिति ज्यादा गंभीर होती, तो उसके क्या परिणाम हो सकते थे. फिलहाल राहत की बात यह है कि मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों को एक बार फिर सामने ला दिया है. अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह साफ हो सके कि चूक कहां हुई और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे.
-भारत एक्सप्रेस
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