मानसून सत्र में केंद्रीय मंत्री अमित शाह
Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र में दोनों सदनों में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा चल रही है. इस दौरान विपक्ष सरकार से कई सवाल कर रहा है. वहीं सरकार की ओर से हर मुद्दे पर जवाब दिया जा रहा है. ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सभी दल एक सुर में पाकिस्तान के खिलाफ मुखर है. लोकसभा में हुई चर्चा सुर्खियां बटोर रही है. इस बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) राज्यसभा में इस चर्चा में भाग लेने के लिए आए. उन्होंने सदन के सामने अपनी बात रखी.
केंद्रीय गृह मंत्री जैसे ही बोलने के लिए खड़े हुए इस दौरान विपक्ष हंगामा करने लगे और प्रधानमंत्री को बुलाने की मांग होने लगी. गृहमंत्री ने कहा सभापति को संबोधित करते हुए कहा कि पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने जो हमला किया. इसका भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए दिया. इसी पर चर्चा के लिए मैं यहां आया हूं. विपक्ष की मांग पर गृहमंत्री ने कहा कि पहले आप मुझे सुन लें पीएम को सुनने का में आपको और तकलीफ होगा.
संवेदना के साथ शुरुआत
पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे जो नागरिक हताहत हुए मैं उन्हें श्रद्धांजली देता हूं और उनके परिजनों के प्रति संवेेदना रखता हूं. मैं प्रधानमंत्री की इच्छा शक्ति के लिए उनका अभिवादन करना चाहता हूं. मान्यवर परसों ही भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया.
बीच में बोलने लगे खड़गे
अमित शाह अपने बात रखते इस बीच नेता प्रतिपक्ष खड़गे बोलने लगे. उन्होंने कहा कि मान्यवर चर्चा के पहले हमने 16 घंटे की चर्चा के लिए प्रधानमंत्री को बुलाने की मांग की थी. अगर पीएम यहां रहते हुए नहीं आते हैं तो यह सदन का अपमान है. प्रधानमंत्री को सदन में आकर जवाब देना चाहिए. अगर वो नहीं आते हैं तो यह सदन और संसदों का अपमान है.
केंद्रीय मंत्री ने दिया जवाब
अपनी बातों के बीच में ही शाह ने खड़गे और कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि खड़के जी बोलने की बात कर रहे हैं. अधिकतर मुख्य मुद्दों पर कांग्रेस उन्हें बोलने का मौका ही नहीं देती है. मैं इनकी मांग पर जवाब दे रहा हूं. bbs एडवाइजरी कमेटी में हुए फैसले के अनुसार कोई भी मंत्री जवाब दे सकता है. उस बैठक में ये थे. इसके बाद भी उनकी मांग और हंगामा दोनों ही आधार हीन है. इनके दौर में कभी आतंकियों पर कार्रवाई नहीं हुई और ये प्रदानमंत्री से जवाब मांग रहे हैं.
पीएम के नेतृत्व में दिया गया जवाब
मान्यवर परसों ही ऑपरेशन महादेव में सुलेमान, फैजल और जिबरान को मौत के घाट उतार दिया. सुलेमान लश्कर के ए श्रेणी का कमांडर था. पगलगाम और गगनगीर में उसके राइफल से गोली चली थी. जिबरान उच्च दर्जे का आतंकी एक और साथी लश्कर का आतंकी था. मान्यवर इससे साफ है कि ये हमला लश्कर के इशारे पर हुई थी. मान्यवर इनको भेजने वालों को ऑपरेशन सिंदूर में और ऑपरेशन महादेव में इन्हें मार दिया गया.
TRF ने ली थी जिम्मेदारी
मान्यवर घटना के बाद मैं मौके पर पहुंच गया था. जिस दिन पहलगाम में घटना हुई. उस दिन वहां से खाली कारतूसों को कब्जे में लिया गया था. ऑपरेश महादेव से पहले फॉरेंसिक टेस्टिंग की गई थी. अब ऑपरेशन सिंदूर के बाद 44 और 25 अलग-अलग कारतूस इनके राइफल से चलने पाए गए. इस कारण अब साफ है कि पहलगाम में गोलियां किसने चलाई थी. उन्हें अब हमारे जवानों ने मार गिराया है.
इन तीनों की सिनाख्त इन्हें शरण देने वाले परिवार ने की है. अन्य सोर्स से भी सभी एजेंसियों ने इनकी पहचान पुख्ता की है. इसके लिए मैं जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ ही सेना और सभी एजेंसियों को धन्यवाद करता हूं.
चिदंबर में उठा सवाल
पी चिदंबर में के सवालों को निशाने पर लेते हुए गृहमंत्री ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस की सोच दुनिया के सामने रखी है. साफ है कि ये आतंकियों को शाब्दिक सेल्टर देते हुए के साथ वोट बैंक के लिए कुछ भी कर सकते हैं. महाराष्ट्र के नेता पृथ्वीराज के पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ऑपरेशन महादेव धर्म का नाम नहीं है. यह शिवाजी का नारा है.
मैं पृथ्वीराज जी से सवाल करना चाहता हूं की कि आप बताइये आप क्या नाम रखना चाहते थे. हमारी सेना के कई बटालियन भगवान के नारों को स्लोगन रखा गया है. क्यों ये नाम भाजपा ने रखा है. मान्यवर ये हर मुद्दे को हिंदू मुस्लिम के नजर से देखते हैं. इनकी प्राथमिकत राजनीति और वोट बैंक है. इनके लिए राष्ट्र की सुरक्षा महत्वपूर्ण नहीं है.
ऑपरेशन सिंदूर पर क्या बोले?
मान्यवर पहलगाम में हमले के समय प्रधानमंत्री विदेश में थे. मैं तुरंत मौके पर पहुंचा. 16 दिन की ब्याही बच्ची के हालात देखा. आज भी उस हालात को सोचता हूं तो नीद खुल जाती है. आतंकियों ने संदेश दिया कि वो कश्मीर को आतंक से मुक्त नहीं होने देंगे. मैं सदन से साफ करना चाहता हूं, संदेश देता हूं कि कश्मीर पर उठी हर नजर को उठा दिया जाएगा.
24 को बिहार में प्रधानमंत्री की सभा पर सवाल उठाने पर गृहमंत्री ने जवाब दिया. उन्होंने बताया कि पीएम मोदी की ये सभी कोई राजनीतिक सभी नहीं थी. प्रधानमंत्री ने इस सभा से आतंक पर बात की थी. उन्होंने देश से वादा किया था कि वो आतंकियों को सबक सिखाएंगे. आज मैं इस सदन को बताना चाहता हूं कि पीएम ने कहा था कि आतंकियों के साथ आकाओं को नहीं छोड़ूंगा.
मान्यवर मैं बता दूं कि उस सभा में मोदीजी की कही हर बात को तीनों सेनाओं और जम्मू कश्मीर पुलिस ने अपना कर्तव्य माना. इसी का परिणाम है कि ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव आज सबके सामने है. सरकार ने हमले के बाद ही सिंधु जल समझौते को रद्द कर दिया. इस पानी पर कश्मीर, पंजाब हरियाणा, राजस्थान में अब सिंधू का पानी पहुंचेगा.
- हमने अटारी की सीमा बंद की
- सार्क वीजा बंद कर दिया
- पाकिस्तान के उच्चायोग में अधिकारियों को अवांछित घोषित किया
आज विपक्ष सवाल कर रहा है कि ये कैसे हुआ, किसने फैसले लिया. इनके CCS की बैठक के फैसले नहीं पढ़ने हैं. ये सभी फैसले मीडिया में आए थे. लेकिन, इन्हें यह नहीं पढ़ना है. इनको तो पर हंगामा करना है. 7 मई को रात में 1 बजकर 4 मिनट में आतंकियों के ठिकानों को हमारी सेना ने ध्वस्त कर दिया. महोदय हमने इसकी तुरंत उनको सूचना भी दी थी. हमने अपनी आत्म रक्षा के अधिकार का उपयोग करते हुए वहां हमला किया. हमारी कार्रवाई खत्म हुई.
पाकिस्तान ने आतंकवाद पर हुए हमले को अपने ऊपर समझा. इसके बाद 8 मई को उन्होंने हमारे आवासीय इलाकों और सेना के ठिकानों पर हमले किए. इसके बाद भी भारत ने संयम रखा. मंदिर, गुरुद्वारा तोड़ा गया लेकिन हम कुछ नहीं बोले. हमने तय किया कि हम उनके रक्षा प्रणाली पर हमला करेंगे. इस कारण 9 मई को हमने उनके रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया. इनके एयर बेस को हमने नेश्तनाबूत कर दिया.
महोदय हमारा मकशद जंग का नहीं था. पाकिस्तान घुटने पर आ गया था. हम उनकी जनता को नहीं मारना चाहते थे. इस बीच पाकिस्तान के dgmo को फोन आया तो मोदीजी ने कहा कि अगर वह रोक रहे हैं तो रोक दो. आज हमारे देश में ही इस पर सवाल उठ रहा है. हमने ऑपरेशन सिंदूर में जैश और लश्कर के कई आतंकियों को मार गिराया है. इसके साथ ही कई आतंकी इस हद तक घायल हो गए हैं कि अब वो किसी काबिल नहीं बचे.
भारत ने इससे पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक और एयर इस्ट्राक किया है. लेकिन, पहले बार आतंक के दिल में हमला हुआ है. इससे पहले तो हमने अपनी भी भूमी पर कार्रवाई की थी. क्योंकि, यह सदन का माना गया सत्य है कि PoK भारत की हिस्सा है. इसी कारण इस बार PoK से आगे हमारी सेना पाकिस्तान में घुसी.
कांग्रेस से पूंछा सवाल
महोजय चिदंबर साबह सदन में नहीं है. मैं उन्हें जवाब देना चाहता हूं कि आतंकी पाकिस्तान से आए थे इस बात का सबूत एजेंसियों ने खोज लिया है. बंबई हमले के दोषी को उनके उनके कार्यकाल में फांसी नहीं हुई. दिग्विजय सिंह ने कहा कि मुंबई में RSS ने हमला कराया था. मैं गर्व से कहना चाहता हूं कि हिंदू कभी आतंकी नहीं हो सकता है. ओछा राजनीति के लिए उन्होंने फर्जी केस बनाए. हालांकि, कोर्ट में उन्हें मुंह की खानी पड़ी.
इस देश के अंदर आतंकवाद बढ़ा और पनपा तो कांग्रेस की नातियों और राजनीति के कारण हुआ है. इन्होंने कुछ नहीं किया. अब ये उछल कर पूंछ रहे हैं कि PoK क्यों नहीं लिया. सदन में कई लोग सवाल कर रहे हैं. मान्यवर उन्हें UN चार्टर की कोई जानकारी नहीं है. इस ऑपरेशन में हमने आत्मरक्षा की कार्रवाई की है. यह कोई जंग नहीं है. पाकिस्तान ने ही स्वीकार किया किया हमें जंग नहीं करना इस लिए कार्रवाई को रोका गया.
हिंसा में 75 फीसदी की कमी
महोदय कांग्रेस के राज में वामपंथ उग्रवाद और कश्मीर में अलगाव चरम पर रहा. इसमें हमारे नागरिक, आम किसान और जवान मारे गए. महोदय हमने इसमें 75 पीसदी की कमी लाई. महादय उन्होंने धारा 370 के जरिए कश्मीर को देश से अलग किया. हमारे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसका विरोध किया तो उनकी हत्या कर दी गई. कश्मीर में कांग्रेस की नीतियों के कारण अहले अलगाव और बाद में आजादी की बात हुई. यही आतंकवाद का आधार बना. इसके बाद धार्मिक कट्टरता बढ़ी लेकिन कांग्रेस ने कभी नहीं रोका. क्योंकि, उन्हें डर था की हमारी वोट कट जाएगी. 5 अगस्त 2019 में इतिहास बदला और आतंक के सफाए का एक युग शुरू हुआ. योजनाएं बनाई गईं और आज जनता देख रही है कि कैसे आतंकी मारे गए.
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